रिपोर्ट: लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत:केरल राज्य के नए युवा डीएफओ के आने के बाद उनकी नयी कार्य संस्कृति का दिखाई देने लगा है असर I
Laxman Singh Bisht
Mon, Aug 24, 2026
चंपावत को मॉडल वन जिला बनाने की पहल, वन विहीन क्षेत्रों में होगा सघन पौधारोपण
केरल राज्य के नए युवा डीएफओ के आने के बाद उनकी नयी कार्य संस्कृति का दिखाई देने लगा है असर I

चंपावत। जिले के 19वें डीएफओ धेनु पुरुषोत्तमन ने चंपावत की समृद्ध वन संपदा और प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखते हुए जिले को उत्तराखंड का मॉडल वन जिला बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत वन विहीन क्षेत्रों में सघन पौधारोपण कर उन्हें हरा-भरा बनाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक वन रेंज में स्मृति वन विकसित किए जाएंगे, जहां लोग अपने प्रियजनों की स्मृति में पौधारोपण कर उनके संरक्षण में सहयोग कर सकेंगे। केरल से आए युवा वन अधिकारी धेनु पुरुषोत्तमन को हिंदी बोलने और समझने में भले ही कुछ कठिनाई हो रही है, लेकिन चंपावत के वन क्षेत्र को बेहतर बनाने को लेकर उनका उत्साह और संकल्प स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उन्होंने चंपावत को उत्तराखंड का मॉडल वन जिला बनाने की अपनी मंशा जाहिर की है। उनकी कार्यशैली का असर विभागीय कार्यप्रणाली में भी दिखाई देने लगा है। कर्मचारी नियत समय पर कार्यालय पहुंच रहे हैं और लंबित कार्यों को टालने के बजाय समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। डीएफओ का कहना है कि काम तो हमें ही करना है। यदि हम प्रतिदिन अपने कार्यों को निपटाने का प्रयास करें तो इससे काम का बोझ कम होता है और मानसिक तनाव भी कम रहता है। उनका जोर ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करने पर है, जिसमें आज का काम कल पर न टाला जाए। उन्होंने कहा कि वनों को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन, इको-टूरिज्म और रोजगारपरक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। मौन पालन एवं च्युरा उत्पादन जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। इस कार्य में उद्यान विभाग से भी समन्वय किया जायेगा I उनका कहना है कि वन्यजीव और प्रकृति मानव जीवन के लिए अनमोल उपहार हैं। जिस प्रकार मनुष्य को इस धरती पर जीवन जीने का अधिकार है, उसी प्रकार वन्यजीवों का भी प्रकृति पर समान अधिकार है। इसलिए वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण बेहद जरूरी है। युवा डीएफओ का कहना है कि चंपावत के लोग बेहद भाग्यशाली हैं कि उन्हें हरे-भरे जंगलों और समृद्ध प्राकृतिक वातावरण के बीच रहने का अवसर मिला है। उनके पूर्वजों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की समृद्ध परंपरा और विरासत उन्हें सौंपी है। अब इस विरासत को सुरक्षित रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।डीएफओ धेनु पुरुषोत्तमन के पदभार ग्रहण करने के बाद वन क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। उनके क्षेत्रीय भ्रमण और निरीक्षण से पौधारोपण एवं वन संरक्षण से जुड़े कार्यों को भी गति मिल रही है। उनका स्पष्ट मानना है कि स्थानीय लोगों को यह समझना होगा कि वन उनके हैं और उनके लिए हैं। वन संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। वन विभाग इस दिशा में लोगों को जोड़ने और उन्हें जागरूक करने के लिए सशक्त माध्यम की भूमिका निभाएगा।डीएफओ ने कहा कि चंपावत के हरे-भरे जंगलों को वनाग्नि से बचाना हम सभी के लिए एक गंभीर चुनौती है। इस चुनौती का सामना केवल वन विभाग के भरोसे नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्थानीय लोगों को भी आगे आकर सहयोग करना होगा। यदि वनाग्नि की रोकथाम के लिए सभी लोग मिलकर काम करेंगे तो न केवल हमारे पूर्वजों की दी हुई प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ हवा, शुद्ध पानी और बेहतर पर्यावरण मिल सकेगा।
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