: चंपावत:सरकारे आई और गई सात दशक बाद भी ग्रामीणों को सड़क का इंतजार/ कठिनाइयों की बेड़ियों से नहीं मिली आजादी/ सड़क न बनने पर चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान /कहा अगर पैदल ही चलना है तो क्यों चुने सरकार? नेताओं ने किए झूठे वादे
Laxman Singh Bisht
Thu, Dec 26, 2024
सरकारे आई और गई सात दशक बाद भी ग्रामीणों को सड़क का इंतजार/ कठिनाइयों की बेड़ियों से नहीं मिली आजादी/ सड़क न बनने पर चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान /कहा अगर पैदल ही चलना है तो क्यों चुने सरकार? नेताओं ने किए झूठे वादे
आदर्श चंपावत जिले के इस गांव के लोग सात दशक पहले आजाद तो गए लेकिन इन्हें कठिनाइयों से आज़ादी नहीं मिल पाई । जी हां ये हैरान होने की बात नहीं है बल्कि ये सरकारी तंत्र की नाकामी का जीता - जागता उदाहरण है । आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के चम्पावत जिले के एक ऐसे गांव की जहाँ आजादी के 77 साल बाद भी सड़क का अभाव है । यहाँ के लोगों को आजादी तो मिल गई लेकिन इनके पावों से कठिन परिस्थितियों की बेड़ियां आज तक नहीं खुल पाई।
कहानी है आदर्श चम्पावत जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत गागर के रज्यूडा और साला तोक की । यहाँ के लोग आज भी सड़क का इंतजार कर रहे हैं । सरकारें आती रही जाती रही नेता आते रहे और जाते रहे लेकिन रज्यूडा और साला तोक की न तस्वीर बदली और ना यहां के लोगों की तकदीर । आजादी के सात दशक बाद भी यहां के लोग सड़क की राह देख रहे हैं । आज भी यहाँ 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद लोग सड़क तक पहुंचते हैं जंगल के रास्ते बच्चे पैदल स्कूल जाने को मजबूर है जंगली जानवरों से उनकी सुरक्षा के लिए ग्रामीण उनके साथ चलते हैं। ग्रामीणों का कहना है नेता चुनाव के वक्त आते हैं और सड़क बनाने का झूठा वादा तो कर जाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें भूल जाते हैं उनकी सुध ना तो सरकार लेती है ना स्थानीय जनप्रतिनिधि और ना ही प्रशासन। टमाटर की खेती के लिए प्रसिद्ध इस गांव के बुजुर्ग कहते हैं सड़क के अभाव में उन्होंने टमाटर की खेती करना तक छोड़ दिया है । उनका कहना है अगर सरकार सड़क बनाती है तो वो फिर से खेती की ओर रूख करेंगे । आजादी के 7 दशक बाद भी उत्तराखंड के गावों में सड़क न होना एक बड़ी समस्या है । सरकार कहती है , पलायन रोकने के लिए योजनाओं को संचालित किया जा रहा है और चंपावत को आदर्श जिला बनाने की तैयारी लेकिन समझ नहीं आता है कि आंखिर इन गावों की सुध सरकार और प्रशासन के द्वारा क्यों नहीं ली जा रही और सड़क विहीन गांव की तस्वीर क्यों नहीं बदली जा रही है। लेकिन इस बार ग्रामीण आर - पार की लड़ाई के मूड में हैं । रज्यूडा और साला के लोगों ने बैठक का आयोजन कर आगामी चुनाव बहिष्कार की बात कही है । ग्रामीणों का साफ कहना है , अगर उन्हें 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद वोट देना पड़ता तो सरकार चुनने और वोट देने का क्या फायदा इस बार वे चुनाव बहिष्कार करेंगे ग्रामीणों ने कहा अगर गांव में सड़क नहीं पहुंचती है तो कुछ ही वर्षों में लोग यहां से पलायन कर जाएंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार ,प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की होगी । कुल मिलाकर सरकार पर यह बड़ा सवाल है
आदर्श चंपावत जिले के इस गांव के लोग सात दशक पहले आजाद तो गए लेकिन इन्हें कठिनाइयों से आज़ादी नहीं मिल पाई । जी हां ये हैरान होने की बात नहीं है बल्कि ये सरकारी तंत्र की नाकामी का जीता - जागता उदाहरण है । आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के चम्पावत जिले के एक ऐसे गांव की जहाँ आजादी के 77 साल बाद भी सड़क का अभाव है । यहाँ के लोगों को आजादी तो मिल गई लेकिन इनके पावों से कठिन परिस्थितियों की बेड़ियां आज तक नहीं खुल पाई।
कहानी है आदर्श चम्पावत जिले के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत गागर के रज्यूडा और साला तोक की । यहाँ के लोग आज भी सड़क का इंतजार कर रहे हैं । सरकारें आती रही जाती रही नेता आते रहे और जाते रहे लेकिन रज्यूडा और साला तोक की न तस्वीर बदली और ना यहां के लोगों की तकदीर । आजादी के सात दशक बाद भी यहां के लोग सड़क की राह देख रहे हैं । आज भी यहाँ 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद लोग सड़क तक पहुंचते हैं जंगल के रास्ते बच्चे पैदल स्कूल जाने को मजबूर है जंगली जानवरों से उनकी सुरक्षा के लिए ग्रामीण उनके साथ चलते हैं। ग्रामीणों का कहना है नेता चुनाव के वक्त आते हैं और सड़क बनाने का झूठा वादा तो कर जाते हैं लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद उन्हें भूल जाते हैं उनकी सुध ना तो सरकार लेती है ना स्थानीय जनप्रतिनिधि और ना ही प्रशासन। टमाटर की खेती के लिए प्रसिद्ध इस गांव के बुजुर्ग कहते हैं सड़क के अभाव में उन्होंने टमाटर की खेती करना तक छोड़ दिया है । उनका कहना है अगर सरकार सड़क बनाती है तो वो फिर से खेती की ओर रूख करेंगे । आजादी के 7 दशक बाद भी उत्तराखंड के गावों में सड़क न होना एक बड़ी समस्या है । सरकार कहती है , पलायन रोकने के लिए योजनाओं को संचालित किया जा रहा है और चंपावत को आदर्श जिला बनाने की तैयारी लेकिन समझ नहीं आता है कि आंखिर इन गावों की सुध सरकार और प्रशासन के द्वारा क्यों नहीं ली जा रही और सड़क विहीन गांव की तस्वीर क्यों नहीं बदली जा रही है। लेकिन इस बार ग्रामीण आर - पार की लड़ाई के मूड में हैं । रज्यूडा और साला के लोगों ने बैठक का आयोजन कर आगामी चुनाव बहिष्कार की बात कही है । ग्रामीणों का साफ कहना है , अगर उन्हें 6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद वोट देना पड़ता तो सरकार चुनने और वोट देने का क्या फायदा इस बार वे चुनाव बहिष्कार करेंगे ग्रामीणों ने कहा अगर गांव में सड़क नहीं पहुंचती है तो कुछ ही वर्षों में लोग यहां से पलायन कर जाएंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार ,प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की होगी । कुल मिलाकर सरकार पर यह बड़ा सवाल है