रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चंपावत: स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत मुख्यमंत्री के जिले में प्यासा जिला अस्पताल।
Laxman Singh Bisht
Thu, Feb 19, 2026
स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत मुख्यमंत्री के जिले में प्यासा जिला अस्पताल।
आरो सिस्टम बंद, मरीज पानी को तरसे दावों और धरातल के बीच गहरी खाई उजागर।

चम्पावत। एक ओर पुष्कर सिंह धामी प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं उनके ही गृह जनपद चम्पावत का जिला चिकित्सालय उन दावों की वास्तविकता सामने ला रहा है। यहां मरीजों को समुचित इलाज के साथ-साथ बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति पीने के पानी को लेकर सामने आई है।जिला चिकित्सालय परिसर में मरीजों और तीमारदारों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के तहत आरो सिस्टम लगाया गया है। उद्देश्य साफ था कि अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ पानी मिल सके। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि मशीन केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गई है। नल खोलने पर एक बूंद पानी तक नहीं निकलता। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब रोजाना सैकड़ों लोग इस अस्पताल में आते हैं, तो क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी की नजर इस बंद पड़ी व्यवस्था पर नहीं जाती होगी?हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक मरीज का तीमारदार रात के समय पानी भरने के लिए आरो मशीन के पास पहुंचता है। मरीज को प्यास लगी थी, लेकिन मशीन से पानी नहीं मिला। देर रात पानी की तलाश में भटकना पड़ा। यह दृश्य न केवल परेशान करने वाला है, बल्कि यह दर्शाता है कि अस्पताल प्रबंधन बुनियादी आवश्यकताओं को लेकर कितना गंभीर है। अस्पताल वह स्थान है जहां मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर स्थिति में होता है। ऐसे में यदि उसे पानी जैसी मूलभूत जरूरत के लिए भी संघर्ष करना पड़े, तो यह व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। चम्पावत जैसे पर्वतीय जिले में दूर-दराज के गांवों से लोग इलाज के लिए जिला चिकित्सालय पहुंचते हैं। कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं और बाहर से बोतलबंद पानी खरीद पाना उनके लिए आसान नहीं होता। ऐसे में अस्पताल परिसर में शुद्ध पेयजल की समुचित और निरंतर व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है। लेकिन जब वही व्यवस्था ठप हो, तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि निगरानी और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है।स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर सुविधाओं के विस्तार और सुधार की बात करता है। बजट जारी होते हैं, मशीनें लगती हैं, योजनाओं की घोषणा होती है, लेकिन उनके रखरखाव और नियमित निरीक्षण की जिम्मेदारी किसकी है? यदि आरो सिस्टम खराब था तो उसे तुरंत दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया? क्या अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर इसे गंभीरता से नहीं लिया गया?यह स्थिति केवल एक मशीन की खराबी का मामला नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी कितनी कमजोर है। जब अस्पताल में भर्ती मरीज को रात में पानी तक उपलब्ध न हो, तो यह संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े करता है। अब आवश्यक है कि संबंधित अधिकारी तत्काल संज्ञान लें, व्यवस्था को दुरुस्त करें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में मरीजों को कम से कम बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान न होना पड़े। स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाली व्यवस्था से तय होती है।