: उत्तराखण्ड के जंगलों की आग से निपटने में सरकार विफल जंगल की आग बुझाने के नाम पर नोडल अधिकारी बनाना महज खानापूर्ति जंगल की आग बुझाने में नाकाम सरकार: बल्यूटिया
Laxman Singh Bisht
Mon, Apr 22, 2024उत्तराखण्ड के जंगलों की आग से निपटने में सरकार विफल जंगल की आग बुझाने के नाम पर नोडल अधिकारी बनाना महज खानापूर्ति जंगल की आग बुझाने में नाकाम सरकार: बल्यूटिया
आज कल उत्तराखण्ड के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने बयान जारी कर कहा कि उत्तराखण्ड के जंगल भीषण आग की चपेट में हैं मगर सरकार के पास जंगल की आग बुझाने के प्रबंधन के कोई भी इंतजाम नहीं हैं। प्रत्येक वर्ष गर्मी के मौसम में उत्तराखण्ड के जंगल आग की वजह से तबाह हो रहे हैं कई जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है पर सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है महज खाना पूर्ति और गुड वर्क दिखाने के लिए नोडल अधिकारी बना कर खानापूर्ति की जा रही है। जंगल की आग से निपटने के लिए सरकार के पास कोई प्रबंधन नहीं है
और ना ही जंगल की आग बुझाने के उपयुक्त उपकरण हैं। ना ही कर्मचारी है बल्यूटिया ने कहा उत्तराखण्ड में 67 प्रतिशत जंगल हैं जो वैश्विक पर्यावरण के संतुलन के साथ- साथ उत्तराखण्ड के पर्यटन में भी अहम भूमिका निभाते हैं जिससे यहाँ के लोगो को रोजगार का भी लाभ होता है। ऐसे संवेदनशील विषय पर सरकार का कोई दृष्टिकोण नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।बल्यूटिया ने कहा उत्तराखण्ड के जंगलों की शुद्ध हवा व पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए पर्यावरण को
दृष्टिगत रखते हुए पर्यटन के माध्यम से उत्तराखण्ड की आय व रोजगार से जोड़ उत्तराखण्ड को देश दुनिया में एक नई पहचान मिल सकती है मगर सरकार तो खनन और आबकारी से ही फुर्सत नहीं मिलना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। वही मुख्यमंत्री धामी ने जंगल की आग को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग के अधिकारियों को आग पर काबू पाने के निर्देश जारी किया है
पर अब वन विभाग के अधिकारी सीएम के आदेशों का कितना पालन करते है यह देखने वाली बात है लेकिन इस समय उत्तराखंड के जंगल आग से धू धू कर जल रहे हैं
आज कल उत्तराखण्ड के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने बयान जारी कर कहा कि उत्तराखण्ड के जंगल भीषण आग की चपेट में हैं मगर सरकार के पास जंगल की आग बुझाने के प्रबंधन के कोई भी इंतजाम नहीं हैं। प्रत्येक वर्ष गर्मी के मौसम में उत्तराखण्ड के जंगल आग की वजह से तबाह हो रहे हैं कई जंगली जानवरों की मौत हो चुकी है पर सरकार को इससे कोई सरोकार नहीं है महज खाना पूर्ति और गुड वर्क दिखाने के लिए नोडल अधिकारी बना कर खानापूर्ति की जा रही है। जंगल की आग से निपटने के लिए सरकार के पास कोई प्रबंधन नहीं है
और ना ही जंगल की आग बुझाने के उपयुक्त उपकरण हैं। ना ही कर्मचारी है बल्यूटिया ने कहा उत्तराखण्ड में 67 प्रतिशत जंगल हैं जो वैश्विक पर्यावरण के संतुलन के साथ- साथ उत्तराखण्ड के पर्यटन में भी अहम भूमिका निभाते हैं जिससे यहाँ के लोगो को रोजगार का भी लाभ होता है। ऐसे संवेदनशील विषय पर सरकार का कोई दृष्टिकोण नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।बल्यूटिया ने कहा उत्तराखण्ड के जंगलों की शुद्ध हवा व पर्यावरण को दृष्टिगत रखते हुए पर्यावरण को
दृष्टिगत रखते हुए पर्यटन के माध्यम से उत्तराखण्ड की आय व रोजगार से जोड़ उत्तराखण्ड को देश दुनिया में एक नई पहचान मिल सकती है मगर सरकार तो खनन और आबकारी से ही फुर्सत नहीं मिलना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। वही मुख्यमंत्री धामी ने जंगल की आग को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग के अधिकारियों को आग पर काबू पाने के निर्देश जारी किया है
पर अब वन विभाग के अधिकारी सीएम के आदेशों का कितना पालन करते है यह देखने वाली बात है लेकिन इस समय उत्तराखंड के जंगल आग से धू धू कर जल रहे हैं