: चंपावत:कोट अमोड़ी में मूसलाधार बारिश से भारी नुकसान ग्रामीणों के बहे खेत खलिहान भवन आए खतरे की जद में
Laxman Singh Bisht
Wed, Jul 17, 2024कोट अमोड़ी में मूसलाधार बारिश से भारी नुकसान
मंगलवार की रात हुई भारी बारिश ने चंपावत जिले के कोट अमोडी के भलुवागाडी तोक में भारी तबाही मचाई है मूसलाधार बारिश से गांव के मोहन चंद्र, जगदीश चंद्र, कृष्ण चंद्र, एवम हेतराम , जगदीश चंद्र, मनोहर दत्त , हेतराम भट्ट ,बलदेव भट्ट, शंकर दत्त, सहित एक दर्जन मकान पूर्णतः खतरे की जद में आ चुके हैं, यहां के लोग रात दिन दहसत के साए में जीने को मजबूर हैं सभी लोगों को जानमाल के साथ मवेशियों की चिंता सताने लगी है, यहां तक की आवासीय मकानो के गोठ में पानी भर गया है, नाले के आसपास लगे दर्जनों खेत कल रात की भारी बारिश में बह गए हैं, ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन भी पशुपालन एवम सब्जी और फसल उत्पादन है, ग्रामीणों ने एनएच पर आरोप लगाते हुए कहा जब से ऑल वेदर रोड की कटिंग का मलबा डंपिंग जोन में न डाल कर जहां तहां फैंक दिया गया, तब से ये मलबा आपदा का मुख्य कारण बना हुआ है
कई बार एनएच के अधिकारियों को इस बात का संज्ञान लेने को कहा गया लेकिन विभाग एवम प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है ग्रामीणों ने कहा सभी अधिकारी व विभाग अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, और लोगों को इस हाल में जीने को छोड़ दिया गया, ग्रामीणों ने कहा विकास के साथ विनाश भी होना स्वाभाविक होता है, लेकिन ऐसे विकास को कौन सहमत होगा जिससे अपना घरबार छिन जाय अपनी आजीविका छिन जाय, किसी भी व्यक्ति के लिए अपना घरबार, रोजगार, पहले होता है वहीं क्षेत्र के ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मलवे का उचित प्रबंधन एवम प्लंमवाल या क्रेटवाल निर्माण कार्य कर यहां के लोगो को बेखौफ पुनर्वासित नहीं किया जाता है तब तक चैन की सांस नहीं लेगे और सड़क में आने को मजबूर होंगे ग्रामीणों ने कहा
वे सालों से हर मंच में इस बात को उठा रहे थे पर विभाग व प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं लिया वही ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा प्रशासन और सरकार मामले का संज्ञान ले अन्यथा आने वाले समय में बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा,
मंगलवार की रात हुई भारी बारिश ने चंपावत जिले के कोट अमोडी के भलुवागाडी तोक में भारी तबाही मचाई है मूसलाधार बारिश से गांव के मोहन चंद्र, जगदीश चंद्र, कृष्ण चंद्र, एवम हेतराम , जगदीश चंद्र, मनोहर दत्त , हेतराम भट्ट ,बलदेव भट्ट, शंकर दत्त, सहित एक दर्जन मकान पूर्णतः खतरे की जद में आ चुके हैं, यहां के लोग रात दिन दहसत के साए में जीने को मजबूर हैं सभी लोगों को जानमाल के साथ मवेशियों की चिंता सताने लगी है, यहां तक की आवासीय मकानो के गोठ में पानी भर गया है, नाले के आसपास लगे दर्जनों खेत कल रात की भारी बारिश में बह गए हैं, ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन भी पशुपालन एवम सब्जी और फसल उत्पादन है, ग्रामीणों ने एनएच पर आरोप लगाते हुए कहा जब से ऑल वेदर रोड की कटिंग का मलबा डंपिंग जोन में न डाल कर जहां तहां फैंक दिया गया, तब से ये मलबा आपदा का मुख्य कारण बना हुआ है
कई बार एनएच के अधिकारियों को इस बात का संज्ञान लेने को कहा गया लेकिन विभाग एवम प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है ग्रामीणों ने कहा सभी अधिकारी व विभाग अपना पल्ला झाड़ रहे हैं, और लोगों को इस हाल में जीने को छोड़ दिया गया, ग्रामीणों ने कहा विकास के साथ विनाश भी होना स्वाभाविक होता है, लेकिन ऐसे विकास को कौन सहमत होगा जिससे अपना घरबार छिन जाय अपनी आजीविका छिन जाय, किसी भी व्यक्ति के लिए अपना घरबार, रोजगार, पहले होता है वहीं क्षेत्र के ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जब तक मलवे का उचित प्रबंधन एवम प्लंमवाल या क्रेटवाल निर्माण कार्य कर यहां के लोगो को बेखौफ पुनर्वासित नहीं किया जाता है तब तक चैन की सांस नहीं लेगे और सड़क में आने को मजबूर होंगे ग्रामीणों ने कहा
वे सालों से हर मंच में इस बात को उठा रहे थे पर विभाग व प्रशासन ने इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं लिया वही ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा प्रशासन और सरकार मामले का संज्ञान ले अन्यथा आने वाले समय में बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा,