: लोहाघाट:किसान ,जवान एवं विज्ञान की तिकड़ी रोकेगी जंगली जानवरों को जंगल में। बूंगा फर्त्याल गांव के जंगल से केवीके की वैज्ञानिक डॉ पंत ने की इसकी शुरुआत।
Laxman Singh Bisht
Wed, Jul 17, 2024किसान ,जवान एवं विज्ञान की तिकड़ी रोकेगी जंगली जानवरों को जंगल में। बूंगा फर्त्याल गांव के जंगल से केवीके की वैज्ञानिक डॉ पंत ने की इसकी शुरुआत।
लोहाघाट। अब जंगलों को हरा भरा बनाए रखना एवं जंगली जानवरों को जंगलों में ही रोकने के लिए बूंगाकिसान जवान एवं विज्ञान की तिगड़ी रोकेगी जंगली जानवरों को जंगल में। बूंगा फर्त्याल गांव के जंगल से केवीके की वैज्ञानिक डॉ पंत ने की इसकी शुरुआत।लोहाघाट मे अब जंगलों को हरा-भरा बनाए रखना एवं जंगली जानवरों को जंगलों में ही रोकने के लिए बूंगा फर्त्याल गांव में किसान, जवान एवं विज्ञान का ऐसा संगम देखने को मिला जहां यदि पहाड़ के हर घर के लोग प्रयास करें तो बिना कोई खर्च के हम अपने पूर्वजों की विरासत जंगलों को हरा-भरा एवं गांव को जंगली जानवरों से बचा सकते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र की युवा वैज्ञानिक डॉ रजनी पंत ने तैयार किए बीज बम के गोलों को किसान, आईटीबीपी के जवानों एवं उच्च शिक्षा प्राप्त दिल्ली के चकाचौंध से दूर रहते हुए, पूर्वजों की माटी को आबाद कर उसमें से सोना पैदा करने के प्रयास में लगे, युवा राकेश उपाध्याय द्वारा जंगलों में फेंकने की शुरुआत की गई। इस तकनीक को लोगों ने खासा पसंद किया है। डॉ पंत ने कहा जंगलों की ऐसी दुर्दशा करने के लिए हम ही जिम्मेदार हैं और हमारे ही द्वारा इसका समाधान भी किया जाएगा। हमने ही जंगली जानवरों का नैसर्गिक आहार समाप्त किया है, यदि वे आज हमें नुकसान पहुंचा रहे हैं तो यह उनका प्राकृतिक गुण है। अब बीज बम से हम जहां धरती का आवरण हरा-भरा कर सकते हैं, साथ ही जंगलों में जंगली जानवरों का भोजन मिलने लगेगा तो वह पत्थरों की मार सहने के लिए क्यों खेतों में आएंगे?
ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह, नव उद्यमी राकेश उपाध्याय, नरेश सिंह, विक्रम सिंह, भावना मुरारी आदि का कहना था कि केवीके की डॉ पंत मैडम ने हमारी आंखें खोल दी हैं। यदि हम अपने जंगलों को नहीं बचाएंगे तो इसके लिए दूसरा कोई नहीं आएगा। केंद्र की बीज बम बनाने की ऐसी आसान तकनीक है जिसे हर कोई अपना सकता है। इससे वास्तव में न केवल हम जंगली जानवरों को भोजन देने का पुण्य प्राप्त कर करेंगे, वहीं उन्हें जंगलों में ही रोकना संभव होगा। इस कार्य को गांव-गांव तक पहुंचने में आईटीबीपी की 36वीं बाहनी के कमांडेंट डीपीएस रावत लोगों को खास प्रोत्साहित करते हुए अपना उल्लेखनीय सहयोग दे रहे हैं। कमांडेंट का कहना है कि जंगलों को हरा-भरा रखने एवं जानवरों को जंगलों में ही रोकने का इससे सरल व सस्ता दूसरा कोई उपाय नहीं हो सकता जिसे हर कोई अपना सकता है।बीज बम बनाने के लिए मिट्टी व गोबर को गिला कर उसके मुट्ठी में आने वाले गोले बनाए जाते हैं, जिसमें बेल वाली सभी सब्ज़ियों के बीज अंदर डालकर उन्हें सूखने के लिए रख देते हैं। इसी प्रकार इनमें जंगली प्रजाति के बीज डालकर उन्हें ऐसे स्थान में रखा जा सकता है जहां जंगल में पेड़ नहीं हैं। अच्छी मिट्टी होने पर उसके भी गोले बनाए जा सकते हैं। इन गोलों में पानी पड़ने के साथ ही बीच अंकुरित होने लगेंगे और बाद में वह पेड़ बन जाएंगे।
लोहाघाट। अब जंगलों को हरा भरा बनाए रखना एवं जंगली जानवरों को जंगलों में ही रोकने के लिए बूंगाकिसान जवान एवं विज्ञान की तिगड़ी रोकेगी जंगली जानवरों को जंगल में। बूंगा फर्त्याल गांव के जंगल से केवीके की वैज्ञानिक डॉ पंत ने की इसकी शुरुआत।लोहाघाट मे अब जंगलों को हरा-भरा बनाए रखना एवं जंगली जानवरों को जंगलों में ही रोकने के लिए बूंगा फर्त्याल गांव में किसान, जवान एवं विज्ञान का ऐसा संगम देखने को मिला जहां यदि पहाड़ के हर घर के लोग प्रयास करें तो बिना कोई खर्च के हम अपने पूर्वजों की विरासत जंगलों को हरा-भरा एवं गांव को जंगली जानवरों से बचा सकते हैं। यहां कृषि विज्ञान केंद्र की युवा वैज्ञानिक डॉ रजनी पंत ने तैयार किए बीज बम के गोलों को किसान, आईटीबीपी के जवानों एवं उच्च शिक्षा प्राप्त दिल्ली के चकाचौंध से दूर रहते हुए, पूर्वजों की माटी को आबाद कर उसमें से सोना पैदा करने के प्रयास में लगे, युवा राकेश उपाध्याय द्वारा जंगलों में फेंकने की शुरुआत की गई। इस तकनीक को लोगों ने खासा पसंद किया है। डॉ पंत ने कहा जंगलों की ऐसी दुर्दशा करने के लिए हम ही जिम्मेदार हैं और हमारे ही द्वारा इसका समाधान भी किया जाएगा। हमने ही जंगली जानवरों का नैसर्गिक आहार समाप्त किया है, यदि वे आज हमें नुकसान पहुंचा रहे हैं तो यह उनका प्राकृतिक गुण है। अब बीज बम से हम जहां धरती का आवरण हरा-भरा कर सकते हैं, साथ ही जंगलों में जंगली जानवरों का भोजन मिलने लगेगा तो वह पत्थरों की मार सहने के लिए क्यों खेतों में आएंगे?
ग्राम प्रधान राजेंद्र सिंह, नव उद्यमी राकेश उपाध्याय, नरेश सिंह, विक्रम सिंह, भावना मुरारी आदि का कहना था कि केवीके की डॉ पंत मैडम ने हमारी आंखें खोल दी हैं। यदि हम अपने जंगलों को नहीं बचाएंगे तो इसके लिए दूसरा कोई नहीं आएगा। केंद्र की बीज बम बनाने की ऐसी आसान तकनीक है जिसे हर कोई अपना सकता है। इससे वास्तव में न केवल हम जंगली जानवरों को भोजन देने का पुण्य प्राप्त कर करेंगे, वहीं उन्हें जंगलों में ही रोकना संभव होगा। इस कार्य को गांव-गांव तक पहुंचने में आईटीबीपी की 36वीं बाहनी के कमांडेंट डीपीएस रावत लोगों को खास प्रोत्साहित करते हुए अपना उल्लेखनीय सहयोग दे रहे हैं। कमांडेंट का कहना है कि जंगलों को हरा-भरा रखने एवं जानवरों को जंगलों में ही रोकने का इससे सरल व सस्ता दूसरा कोई उपाय नहीं हो सकता जिसे हर कोई अपना सकता है।बीज बम बनाने के लिए मिट्टी व गोबर को गिला कर उसके मुट्ठी में आने वाले गोले बनाए जाते हैं, जिसमें बेल वाली सभी सब्ज़ियों के बीज अंदर डालकर उन्हें सूखने के लिए रख देते हैं। इसी प्रकार इनमें जंगली प्रजाति के बीज डालकर उन्हें ऐसे स्थान में रखा जा सकता है जहां जंगल में पेड़ नहीं हैं। अच्छी मिट्टी होने पर उसके भी गोले बनाए जा सकते हैं। इन गोलों में पानी पड़ने के साथ ही बीच अंकुरित होने लगेंगे और बाद में वह पेड़ बन जाएंगे।