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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:बोट हाउस में भवन खतरे के नाम पर वन विभाग ने देवदार के हरे पेड़ों पर चलवा दी आरी।

Laxman Singh Bisht

Thu, Sep 25, 2025

बोट हाउस में भवन खतरे के नाम पर वन विभाग ने देवदार के हरे पेड़ों पर चलवा दी आरी।

पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश।

किसके दबाव पर वन विभाग ने दी हरे देवदार के पेड़ों को काटने की अनुमति।

देवदार नगरी लोहाघाट में देवदारों का अस्तित्व खतरे में। डीएम से देवदारों का अस्तित्व बचाने की गुहार।लोहाघाट की शान कहे जाने वाले बहुमूल्य देवदार के पेड़ों का अस्तित्व लगातार खतरे में है। जिस विभाग पर इन्हें सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है वही वन विभाग भवन खतरे के नाम पर देवदार के इन बहुमूल्य पेड़ों को काटने की अनुमति दे रहा है। आखिर वन विभाग किसके दबाव पर इन्हें काटने की आंख बंद कर अनुमति दे रहा है यह यक्ष प्रश्न है। लोहाघाट नगर के बोट हाउस में गुरुवार को वन विभाग की सहमति पर वन निगम ने देवदार के दो हरे पेड़ों को काट दिया।

इस प्रकार हरे पेड़ों के काटे जाने पर पर्यावरण प्रेमियों ने गहरी नाराजगी जताई है ।पर्यावरण प्रेमियों ने कहा लगातार लोहाघाट नगर में देवदार के पेड़ सुखाए जा रहे है और वन विभाग की सह पर देवदार काटे जा रहे हैं ।कहा लोगों ने देवदार बनी में अतिक्रमण कर भवन बनाए है और अब भवन खतरे के नाम पर पेड़ों को बेदर्दी से काटा जा रहा है ।कहा पूर्व में भी इस क्षेत्र में दिनदहाड़े सात देवदार के हरे पेड़ काट दिए गए थे। मामले में क्या कार्रवाई हुई कुछ पता नहीं। मामले में डीएफओ चंपावत नवीन कुमार पंत ने बताया इन पेड़ों को काटने की स्वीकृति उनके कार्यकाल से पहले दी गई थी छपान होने पर वन निगम के द्वारा पेड़ों को काटा जा रहा है। मामले में एसडीएम लोहाघाट नीतू डांगर ने बताया पूर्व में कार्यालय में पेड़ों से भवन को खतरा होने की अर्जी आदर्श कॉलोनी निवासी रमेश सिंह अधिकारी के द्वारा तत्कालीन एसडीएम के समक्ष लगाई गई थी ।जिस पर बन व राजस्व कर्मियों के द्वारा संयुक्त निरीक्षण कर वन विभाग को पेड़ों की स्थिति देख कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे । जानकारी के मुताबिक तत्कालीन रेंजर के द्वारा पेड़ों को भवन के लिए खतरा होने की रिपोर्ट डीएफओ कार्यालय चंपावत को प्रेषित की गई थी। तत्कालीन डीएफओ के निर्देश पर वन निगम के द्वारा लाट आवंटित होने पर देवदार के पेड़ों को काटा जा रहा है।

मामले में लोगों ने कहा अगर इस प्रकार से भवनो के खतरे की जद पर आने के नाम पर देवदार के पेड़ों को काटा जाता रहेगा तो एक दिन लोहाघाट से देवदारों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। लोगों ने कहा आखिर वन विभाग के अधिकारियों ने किसके दबाव पर हरे पेड़ों को काटने की अनुमति दी अब विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लग रहे है। लोगों ने जिलाधिकारी चंपावत से देवदार के पेड़ों का कटान रोकने तथा हरे पेड़ों को काटने की अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है ।लोगों ने कहा लंबे समय से कोली झील व अन्य जगहो में देवदार के सूखे पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जा रही है एक और वन विभाग हरे पेड़ों को काटने की अनुमति दे रहा है। फिलहाल दो बहुमूल्य पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई है आगे भी चढ़ती रहेगी। मालूम हो सबसे ज्यादा नुकसान इसी क्षेत्र में लोगों के द्वारा देवदार के पेड़ों को पहुंचाया गया है। पर संबंधित खामोश है।...

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