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: लोहाघाट:वर्ष 2050 की आवश्यकताओं को देखते हुए बनाना होगा चंपावत जिले का मास्टर प्लान पूर्वजों की विरासत घराट व नौलों का पर्यटन की दृष्टि से किया जाए संरक्षण एवं संवर्धन :डॉ पाण्डे (पूर्व डीएम)।

Laxman Singh Bisht

Sun, Jun 2, 2024
वर्ष 2050 की आवश्यकताओं को देखते हुए बनाना होगा चंपावत जिले का मास्टर प्लान पूर्वजों की विरासत घराट व नौलों का पर्यटन की दृष्टि से किया जाए संरक्षण एवं संवर्धन :डॉ पाण्डे। चंपावत एवं पिथौरागढ़ जिलों का तेजी के साथ विकास तो होता जा रहा है, इसे सुनियोजित रूप से कार्यान्वित करने के लिए वर्ष 2050 तक की जरूरतों को देखते हुए दोनों जिलों का मास्टर प्लान बनाना होगा,जिसे जोन में बांटा जा सकता है । यह बात तीन दशक पूर्व पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रहे डॉ अनूप पांडे ने दोनों जिलों का भ्रमण करने के बाद यह बात कही। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव व भारत के चुनाव आयुक्त का सफर तय कर यहां भ्रमण कर रहे डॉ पांडे को अपने कार्यकाल की सभी यादें तरोताजा हैं,कहा पिथौरागढ़ एवं चंपावत को मैं अपना मायका मानता आ रहा हूं। यहां की यादें, लोगों का निश्चल प्रेम, उनके जीवन की अमूल अमूल्य धरोहर रहा है, जिसे वे कभी नहीं भूल सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के साथ सड़क के दोनों ओर की भी प्लानिंग की जानी आवश्यक है। पर्यटन की दृष्टि से सड़कों के दोनों ओर बहुत कुछ किया जा सकता है। इस कार्य में देर होने से अतिक्रमण को बढ़ावा मिलेगा। विकास के साथ पर्यावरण व जल संरक्षण को आवश्यक बताते हुए उनका कहना है कि जिस तेजी के साथ जल संकट गहराता जा रहा है, उसमें बोरिंग से पेयजल प्राप्त करना स्थाई समाधान नहीं है बल्कि बहते पानी का संचय, पोषक पेड़ों का स्रोतों में रोपड़ के साथ झीलें बनाई जानी चाहिए। कोली ढेक झील को जल संरक्षण व पर्यटन विकास का सशक्त माध्यम बताते हुए पूर्वजों की विरासत घराट व नौलों का पर्यटन की दृष्टि से संरक्षण किया जाना चाहिए। यहां के वनों को डिफेंस के बराबर महत्व देने की जरुरत बताते हुए उनका कहना है कि यहां हर हालत में प्राकृतिक परिवेश एवं प्रकृति का आवरण बना रहना चाहिए। इसकी सुरक्षा ही हमारा वजूद है।  डॉ पाण्डे ने स्थानीय संसाधनो संशाधनों का वैज्ञानिक आधार पर दोहन करने की जरुरत बताते हुए कहा यहां हेल्थ रिजॉर्ट बनाने की भी ज़रूरत है, जिससे आयुर्वेद एवं जड़ी बूटियों से लोगों का उपचार व आरोग्य जीवन बिताने के लिए उन्हें योग व प्राणायाम से भी जोड़ा जाना चाहिए। आज लोग एलोपैथिक दवाओं से तौबा कर आयुर्वेद एवं योग,प्राणायाम की शरण में आते जा रहे हैं। इस कार्य में बड़ा रोजगार भी छुपा हुआ है। बंदरों से छुटकारा पाने के लिए इंडोनेशिया के वाली शहर की तर्ज पर मंकी फॉरेस्ट बनाया जाना चाहिए, वहां यह प्रयोग पूरी तरह सफल हुआ है और इसे पर्यटन से जोड़ा है। डॉ पाण्डे का कहना है कि सरकार जनता के द्वार की अवधारणा को मजबूती से संचालित कर लोगों को उनके घर में सुविधाएं देने के साथ उनका धन व समय बचाया जाना चाहिए। ईंधन के विकल्प के रूप में सौर उर्जा का अधिकाधिक दोहन आज के समय की बड़ी जरूरत बन गया है।

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