: नैनिताल हाईकोर्ट ने फांसी की सजा पर सुरक्षित रखा निर्णय अभियुक्त ने अपने परिवार के पांच लोगों की की थी निर्मम हत्या देहरादून सत्र न्यायाधीश ने सुनाया था फांसी का फैसला
Laxman Singh Bisht
Sat, Jul 6, 2024
हाईकोर्ट ने फांसी की सजा पर सुरक्षित रखा निर्णय अभियुक्त ने अपने परिवार के पांच लोगों की की थी निर्मम हत्या देहरादून सत्र न्यायाधीश ने सुनाया था फांसी का फैसला
बर्ष-2014 में दीपावली की रात अपने परिवार के पांच सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले में दोषी हरमीत को सत्र न्यायालय देहरादून से मिली फांसी की सजा पर हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 23 अक्टूबर 2014को हरमीत ने पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, गर्भवती बहन हरजीत कौर, तीन साल की भांजी सहित बहन की कोख में पल रहे गर्भ की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। उसने पांच लोगों की निर्मम हत्या करने में चाकू से 85 बार वार किया था। इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में हुई है।पुलिस ने जांच में पाया कि हरमीत के पिता की दो शादियां थी उसको शक था कि उसके पिता सारी संपत्ति उसकी सौतेली बहन के नाम पर ना कर दें ।उसकी सौतेली बहन एक सप्ताह पहले अपनी डिलीवरी के लिए आई हुई थी ।उसकी शादी की सालगिरह 25 अक्टूबर को थी जिसकी वजह से वह 25 अक्टूबर को ही डिलीवरी करना चाहती थी लेकिन इससे पहले ही हरमीत ने सभी पांच लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इस केस का मुख्य गवाह पांच वर्षीय कमलजीत बच गया।
बर्ष-2014 में दीपावली की रात अपने परिवार के पांच सदस्यों की निर्मम हत्या के मामले में दोषी हरमीत को सत्र न्यायालय देहरादून से मिली फांसी की सजा पर हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। 23 अक्टूबर 2014को हरमीत ने पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, गर्भवती बहन हरजीत कौर, तीन साल की भांजी सहित बहन की कोख में पल रहे गर्भ की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। उसने पांच लोगों की निर्मम हत्या करने में चाकू से 85 बार वार किया था। इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में हुई है।पुलिस ने जांच में पाया कि हरमीत के पिता की दो शादियां थी उसको शक था कि उसके पिता सारी संपत्ति उसकी सौतेली बहन के नाम पर ना कर दें ।उसकी सौतेली बहन एक सप्ताह पहले अपनी डिलीवरी के लिए आई हुई थी ।उसकी शादी की सालगिरह 25 अक्टूबर को थी जिसकी वजह से वह 25 अक्टूबर को ही डिलीवरी करना चाहती थी लेकिन इससे पहले ही हरमीत ने सभी पांच लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इस केस का मुख्य गवाह पांच वर्षीय कमलजीत बच गया।