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रिपोर्ट:जगदीश जोशी 👹👹 : बाराकोट की प्रेमा देवी बनीं ग्रामोत्थान परियोजना की प्रेरणास्रोत, परिवार की आय बढ़ा कर समाज में बनाई विशेष पहचान

Laxman Singh Bisht

Wed, Jun 18, 2025

सुई-धागे से संजोया आत्मनिर्भरता का सपनाविकासखण्ड बाराकोट के ग्राम बाराकोट की निवासी श्रीमती प्रेमा देवी आज उन हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी हैं, जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। शिव स्वयं सहायता समूह की सदस्य प्रेमा देवी ने ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से सिलाई के क्षेत्र में स्वरोजगार की शुरुआत की और आज अपने परिवार की आय में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।जब गांव में कपड़ों की सिलाई की माँग बढ़ने लगी, तब प्रेमा देवी ने इस अवसर को पहचानते हुए सिलाई का कार्य प्रारंभ करने का निश्चय किया। उनके पति ने भी उनका साथ दिया, और दोनों ने मिलकर छोटे स्तर से काम की शुरुआत की। प्रारंभ में संसाधनों की कमी और आर्थिक चुनौतियाँ रहीं, लेकिन दृढ़ निश्चय और मेहनत से उन्होंने हार नहीं मानी।

ग्रामोत्थान परियोजना से मिली नई राह

ग्रामोत्थान परियोजना, जो कि आईफैड (IFAD) एवं केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी योजना है — ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) एवं एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (ILSP) के अंतर्गत गठित महिला समूहों को उद्यमशीलता के लिए प्रोत्साहित करती है। इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर पलायन को रोकना और जीवनस्तर सुधारना है।समूह बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से प्रेमा देवी को लघु उद्यम योजना की जानकारी दी गई।श्रीमती प्रेमा को परियोजना द्वारा संचालित लघु उद्यम स्थापना के अंतर्गत सिलाई की दुकान के लिए चयन किया गया। तत्पश्चात परियोजना की टीम द्वारा इनका भौतिक सत्यापन पूर्ण करके मानकानुसार आवश्यक दस्तावेज तैयार किये गए। ग्रामोथान परियोजना द्वारा उद्यम स्थापित करने हेतु 1 लाख रूपये दिए गए, जिसके अंतर्गत मानकानुसार 30 प्रतिशत की अनुदान धनराशि 30 हजार रूपये दी गई तथा 50 प्रतिशत की धनराशि 50 हजार रुपये हेतु परियोजना द्वारा सहयोग कर बैंक ऋण कराया गया तथा 20 प्रतिशत की धनराशि 20 हजार रुपये लाभार्थी द्वारा अशंदान के रुप में अपने व्यवसाय हेतु स्वयं खर्च किये गये।इस सहयोग से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनके काम की गुणवत्ता के चर्चे गांव-गांव में फैलने लगे और आसपास की महिलाएं भी कपड़े सिलवाने आने लगीं। मेहनत रंग लाई और प्रेमा ने अपनी एक मजबूत पहचान बना ली।

हर महीने 6-7 हजार रुपये की आय, परिवार में खुशहाली

आज प्रेमा देवी सिलाई कार्य से हर माह लगभग ₹6,000–₹7,000 की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे आत्मसम्मान के साथ जीवन जी रही हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।प्रेमा देवी की यह सफलता सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ते कदमों की गूंज है। ग्रामोत्थान परियोजना के माध्यम से उन्होंने यह साबित कर दिया कि सरकारी योजनाएं यदि सही व्यक्ति तक पहुँचे तो उनका परिणाम कितना सशक्त और सकारात्मक हो सकता है।

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