: लोहाघाट:मॉडल जिले में दम तोड़ती जा रही है रोडवेज की व्यवस्था।विधायक भी नाराज। पूर्व पालिकाध्यक्ष एवं व्यापारियों ने भी दी आंदोलन की धमकी।
Laxman Singh Bisht
Sat, Dec 14, 2024
मॉडल जिले में दम तोड़ती जा रही है रोडवेज की व्यवस्था।
मॉडल जिले में बद इंतजामी के कारण रोडवेज जैसा महत्वपूर्ण विभाग दम तोड़ने लगा है। हाल ही तक सर्वाधिक आय एवं अधिक किलोमीटर तय करने वाली डिपो की बसें, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलो में अपना अहम रोल अदा करता था। डिपो को Bs-6 बारह बसें मिलने पर उनका संचालन दिल्ली आदि स्थानों के लिए किया जाने लगा। 43के बसों बेड़े वाले इस डिपो में 23 बसें डिपो कार्यशाला में खड़ी है। सुबह 7:00 से 9:00 बजे के बीच यहां से कोई भी बस संचालित नहीं होती है। लोहाघाट से कोटद्वार, कानपुर, चंडीगढ़, लोहाघाट से वाया देवीधूरा- देहरादून तथा लोहाघाट से सिमलखेत होते हुए अल्मोड़ा - रानीखेत चलाने की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि करते आ रहे हैं। लेकिन इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।इधर रोडवेज के एजीएम धीरज वर्मा का कहना है कि डिपो कार्यशाला में स्टाफ व कलपुर्जों की कमी के कारण बेहतर परिवहन सुविधा देने में बाधाएं आ रही है। 23 बसें अपना मानक पूरा कर चुकी है। रिटायर कर्मियों के स्थान पर नए लोग नहीं आ रहे है । क्षेत्रीय विधायक खुशाल सिंह अधिकारी रोडवेज की व्यवस्था से खासे नाराज है।उनका कहना है कि लोहाघाट का रोडवेज ऐसा डिपो है जिसकी ग्रामीण क्षेत्रों में एक भी बस नहीं चलती है। वहीं पूर्व पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने कहा डिपो में बसों का संचालन न होने कारण तमाम कर्मचारी बगैर काम का वेतन ले रहे हैं। उन्हें खाली बैठे स्वयं शर्म आ रही है।यहां कई जिम्मेदार पदों में बैठे कर्मचारी व अधिकारी अपने तबादलों के चक्कर में रहते हैं। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष गोविंद वर्मा व व्यापारियों ने कहा यदि शीघ्र रोडवेज की व्यवस्था में सुधार न हुआ तो उन्हें आंदोलन करने से कोई नहीं रोक सकता।
मॉडल जिले में बद इंतजामी के कारण रोडवेज जैसा महत्वपूर्ण विभाग दम तोड़ने लगा है। हाल ही तक सर्वाधिक आय एवं अधिक किलोमीटर तय करने वाली डिपो की बसें, उत्तराखंड के पर्वतीय जिलो में अपना अहम रोल अदा करता था। डिपो को Bs-6 बारह बसें मिलने पर उनका संचालन दिल्ली आदि स्थानों के लिए किया जाने लगा। 43के बसों बेड़े वाले इस डिपो में 23 बसें डिपो कार्यशाला में खड़ी है। सुबह 7:00 से 9:00 बजे के बीच यहां से कोई भी बस संचालित नहीं होती है। लोहाघाट से कोटद्वार, कानपुर, चंडीगढ़, लोहाघाट से वाया देवीधूरा- देहरादून तथा लोहाघाट से सिमलखेत होते हुए अल्मोड़ा - रानीखेत चलाने की मांग क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि करते आ रहे हैं। लेकिन इस ओर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है।इधर रोडवेज के एजीएम धीरज वर्मा का कहना है कि डिपो कार्यशाला में स्टाफ व कलपुर्जों की कमी के कारण बेहतर परिवहन सुविधा देने में बाधाएं आ रही है। 23 बसें अपना मानक पूरा कर चुकी है। रिटायर कर्मियों के स्थान पर नए लोग नहीं आ रहे है । क्षेत्रीय विधायक खुशाल सिंह अधिकारी रोडवेज की व्यवस्था से खासे नाराज है।उनका कहना है कि लोहाघाट का रोडवेज ऐसा डिपो है जिसकी ग्रामीण क्षेत्रों में एक भी बस नहीं चलती है। वहीं पूर्व पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने कहा डिपो में बसों का संचालन न होने कारण तमाम कर्मचारी बगैर काम का वेतन ले रहे हैं। उन्हें खाली बैठे स्वयं शर्म आ रही है।यहां कई जिम्मेदार पदों में बैठे कर्मचारी व अधिकारी अपने तबादलों के चक्कर में रहते हैं। पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष गोविंद वर्मा व व्यापारियों ने कहा यदि शीघ्र रोडवेज की व्यवस्था में सुधार न हुआ तो उन्हें आंदोलन करने से कोई नहीं रोक सकता।