: चम्पावत :कोट अमोडी व सन्दर्का गांव के लोग डटे रहे चुनाव बहिष्कार पर- क्षेत्र में अनदेखी से आहत दोनों गांवों के 450 मतदाताओें ने नही डाला वोट मतदान केंद्र में पसरा सन्नाटा
Laxman Singh Bisht
Fri, Apr 19, 2024कोट अमोडी व सन्दर्का गांव के लोग डटे रहे चुनाव बहिष्कार पर- क्षेत्र में अनदेखी से आहत दोनों गांवों के 450 मतदाताओें ने नही डाला वोट मतदान केंद्र में पसरा सन्नाटा
चंपावत जिले के कोट अमोडी ग्राम पंचायत के दो गांव के लोगों सन्दर्का और कोट अमोडी गांव के लोग चुनाव बहिष्कार पर डटे रहे। ग्रामीणों ने गांव ने सड़क सुविधा सहित अन्य मुद्दों को लेकर इस बार चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। शुक्रवार 19 अप्रैल को जिले के 344 बूथों पर लोकतंत्र के महापर्व का आगाज हो गया। लेकिन इससे हटकर जिले के कोट अमोड़ी और सन्दर्का गांव के 450 से अधिक मतदाताओं ने क्षेत्र की अनदेखी से आहत होकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी ग्रामीण क्षेत्र में सड़क सुविधा सहित है अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सरकार व जिला प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिससे परेशान ग्रामीणों ने इस बार चुनाव बहिष्कार करने का एलान किया था और अपने फैसले पर कायम रहे। गांव से एक भी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने नही पहुंचा। गांव के लोग आज भी पांच किमी की पैदल यात्रा करने के बाद गांव तक पहुंचते हैं। जिसमें गांव के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
चंपावत जिले के कोट अमोडी ग्राम पंचायत के दो गांव के लोगों सन्दर्का और कोट अमोडी गांव के लोग चुनाव बहिष्कार पर डटे रहे। ग्रामीणों ने गांव ने सड़क सुविधा सहित अन्य मुद्दों को लेकर इस बार चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया था। शुक्रवार 19 अप्रैल को जिले के 344 बूथों पर लोकतंत्र के महापर्व का आगाज हो गया। लेकिन इससे हटकर जिले के कोट अमोड़ी और सन्दर्का गांव के 450 से अधिक मतदाताओं ने क्षेत्र की अनदेखी से आहत होकर ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी ग्रामीण क्षेत्र में सड़क सुविधा सहित है अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। लेकिन सरकार व जिला प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिससे परेशान ग्रामीणों ने इस बार चुनाव बहिष्कार करने का एलान किया था और अपने फैसले पर कायम रहे। गांव से एक भी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने नही पहुंचा। गांव के लोग आज भी पांच किमी की पैदल यात्रा करने के बाद गांव तक पहुंचते हैं। जिसमें गांव के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।