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: देहरादून:लो आ गया UCC ---- हाँथ में संविधान लेकर विधान सभा पहुंचे सीएम धामी

Laxman Singh Bisht

Tue, Feb 6, 2024
लो आ गया UCC ----हाँथ में संविधान लेकर विधान सभा पहुंचे सीएम धामी  
– सभी धर्मों में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल होगी – पुरुष-महिला को तलाक देने के समान अधिकार – लिव इन रिलेशनशिप डिक्लेयर करना जरूरी – लिव इन रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 6 माह की सजा – लिव-इन में पैदा बच्चों को संपत्ति में समान अधिकार – महिला के दोबारा विवाह में कोई शर्त नहीं – अनुसूचित जनजाति दायरे से बाहर – बहु विवाह पर रोक, पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी नहीं – शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी बिना रजिस्ट्रेशन सुविधा नहीं – उत्तराधिकार में लड़कियों को बराबर का हक   UCC लागू तो क्या होगा ?   – हर धर्म में शादी, तलाक के लिए एक ही कानून – जो कानून हिंदुओं के लिए, वही दूसरों के लिए भी – बिना तलाक एक से ज्यादा शादी नहीं कर पाएंगे – मुसलमानों को 4 शादी करने की छूट नहीं रहेगी UCC से क्या नहीं बदलेगा ? – धार्मिक मान्यताओं पर कोई फर्क नहीं – धार्मिक रीति-रिवाज पर असर नहीं – ऐसा नहीं है कि शादी पंडित या मौलवी नहीं कराएंगे – खान-पान, पूजा-इबादत, वेश-भूषा पर प्रभाव नहीं   बीजेपी ने किया था चुनावी वादा वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा द्वारा जनता से किए गए प्रमुख वादों में यूसीसी पर अधिनियम बनाकर उसे प्रदेश में लागू करना भी शामिल था. वर्ष 2000 में अस्तित्व में आए उत्तराखंड राज्य में लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने का इतिहास रचने के बाद भाजपा ने मार्च 2022 में सरकार गठन के तत्काल बाद मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति के गठन को मंजूरी दे दी थी(क) पक्षकारों के मध्य विवाह का अनुष्ठान सम्पन्न हो चुका हो और वे तब से जीवनसाथी के रूप में एक साथ रह रहे हों;   (ख) जब तक कि विवाह के समय किसी भी पक्षकार की रूढ़ि और प्रथा के अन्तर्गत अन्यथा अनुमन्य न हो, पंजीकरण के समय किसी भी पक्षकार का एक से अधिक पति/पत्नी जीवित न हो;   (ग) पुरुष ने इक्कीस वर्ष की तथा स्त्री ने अठारह वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो;   (घ) पक्षकार प्रतिषिद्ध नातेदारी की डिग्रियों के भीतर न हों:   परन्तु यह है कि उपर्युक्त निषेध उन व्यक्तियों पर लागू नहीं होंगे जिनकी रूढ़ि और प्रथा के अन्तर्गत उक्त नातेदारी अनुमन्य है:   परन्तु यह और कि ऐसी रूढ़ि और प्रथा लोकनीति और नैतिकता के विपरीत न हो।   8. संहिता के प्रारंभ होने के पश्चात पारित विवाह-विच्छेद या अकृतता के न्यायिक आदेश का पंजीकरण -   (1) राज्य के किसी भी न्यायालय द्वारा इस संहिता के प्रारंभ होने के पश्चात पारित विवाह-विच्छेद या विवाह की अकृतता की कोई भी आज्ञप्ति धारा 11 की उपधारा (1) में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुरूप पंजीकृत किया जायेगा।   (2) राज्य के बाहर स्थित किसी भी न्यायालय द्वारा इस संहिता के प्रारंभ होने के पष्चात पारित विवाह-विच्छेद या विवाह की अकृतता की कोई भी आज्ञप्ति, जहां कम से कम एक पक्षकार राज्य का निवासी है, धारा 11 की उपधारा (2) में उल्लिखित्त प्रक्रिया के अनुरूप पंजीकृत किया जाएगा।   9. संहिता के प्रारंभ होने से पूर्व विवाह-विच्छेद या विवाह की अकृतता के आज्ञप्ति का पंजीकरण -   (1) राज्य के किसी भी न्यायालय द्वारा इस संहिता के प्रारंभ होने से पूर्व, पारित विवाह-विच्छेद या विवाह की अकृतता की कोई भी आज्ञप्ति, धारा 11 की उपधारा (3) में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुरूप पंजीकृत किया जा सकता है।   (2) राज्य के बाहर स्थित किसी भी न्यायालय द्वारा इस संहिता के प्रारंभ होने से पूर्व पारित विवाह-विच्छेद या विवाह की अकृतता की कोई भी आज्ञप्ति, जहां कम से कम एक पक्षकार राज्य का निवासी है, धारा 11 की उपधारा (4) में उल्लिखित प्रक्रिया के अनुरूप पंजीकृत किया जा सकेगा।

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