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उत्तराखण्ड पुलिस बोली हमारे पास कोई जादू का डंडा नहीं केस किया बंद मां ने खुद ढूंढ लिया बेटे के हत्यारे को।

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : उत्तराखण्ड पुलिस बोली हमारे पास कोई जादू का डंडा नहीं केस किया बंद मां ने खुद ढूंढ लिया बेटे के हत्यारे को।

Laxman Singh Bisht

Mon, Apr 6, 2026

उत्तराखण्ड पुलिस बोली हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं केस किया बंद मां ने खुद ढूंढ लिया बेटे के हत्यारे को।

बेटे के कातिल को ढूंढने के लिए डेढ़ साल तक संघर्ष करती रह रही मा की दिल छू देने वाली दास्तान।

उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खोलती रिपोर्ट।

उत्तराखंड पुलिस के अधिकारी अपने कार्य के प्रति कितने गंभीर हैं अपनी जिम्मेदारियां को किस लापरवाही से निभा रहे हैं ।यह घटना उत्तराखंड पुलिस के लापरवाह अधिकारियों की पोल खोलती नजर आ रही है। जब पुलिस ने युवक को कुचलने वाले डंपर चालक को ढूंढने से इनकार कर दिया तो मां ने डेढ़ वर्ष की कड़ी मशक्कत के बाद बेटे के कातिल को ढूंढ कर पुलिस के सामने खड़ा कर दिया। घटना 16 फरवरी 2024 की है जब देहरादून के सहस्त्र धारा रोड विश्वनाथ एंक्लेव निवासी ललित चौधरी का 18 वर्षीय पुत्र क्षितिज चौधरी प्रेम नगर क्षेत्र में स्थित सुविधा स्टोर के सामने से पैदल गुजर रहा था तभी एक डंपर ने उसे कुचल दिया और चालक मौके से फरार हो गया था उपचार के दौरान क्षितिज ने दम तोड़ दिया । बेटे की मौत के बाद पुलिस का रवैया इंसाफ मांग रही मां के प्रति बेहद अमानवीय रहा। स्वर्गीय क्षितिज की मां ललिता चौधरी ने संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कर अपने बेटे के कातिल डंपर चालक को ढूंढने की मांग की। पर पुलिस बार-बार उन्हें आश्वासन देते रही संबंधित थाने के पुलिस अधिकारी से अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रही मां से यह तक कह दिया, मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जो में इतनी जल्दी कार्रवाई कर दूंगा,। यह उस जिम्मेदार पुलिस अधिकारी का कथन है जिस पर एक 18 वर्षीय युवक की सड़क हादसे में हुई मौत के मामले की जांच की जिम्मेदारी थी। उत्तराखंड पुलिस के इन सुपर कॉप्स ने बिना गहन जांच केस बंद कर दिया ।लेकिन युवक की मां ललिता चौधरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने जिस केस में पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए हाथ खड़े कर दिए उस केस में इस मां ने खुद सड़कों की खाक छानी, सैकड़ो सीसीटीवी कैमरा की फुटेज खंगाली और अंत में बेटे को कुचलने वाले डंपर चालक को खोज निकाला और पुलिस से कार्रवाई की मांग की।

अपने जवान बेटे को मौत के घाट उतारने वाले डंपर चालक को ढूंढने में इस मां को पूरे डेढ़ वर्ष लगे और अंत बेबस मां ने भटकने के बाद 10 संदिग्ध वाहनों के नंबर पुलिस को दिए।लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई । आखिर डेढ़ साल संघर्ष के बाद मां की मेहनत रंग लाई और उन्होंने खुद उस अज्ञात वाहन और उसके मालिक अंकित चौहान का पता लगा लिया और एसपी कार्यालय में मय सबूतो के साथ प्रार्थना पत्र सोपा तथा कार्रवाई की मांग की। अब पुलिस जगी है एसएसपी ने मामले को देखते हुए अब दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। जहां इस केस ने उत्तराखंड पुलिस के अधिकारियों की लापरवाही की पोल खोली है तो वही पूरे पुलिस महकमें को भी बदनाम कर दिया। इन्हीं अधिकारियों की वजह से आज जनता का पुलिस से विश्वास हटता जा रहा है। लोगों ने कहा जिस पुलिस को लोगों की रक्षा व उनकी सहायता के लिए रखा गया है उनके द्वारा उल्टा जनता को परेशान किया जा रहा है। मामले मे प्रदेश की जनता पुलिस की कार्यप्रणाली की निंदा करते हुए इस मां के हौसले को सलाम करते हुए इस केस के पुलिस अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग कर रही हैं। लोगों ने कहा पुलिस की लचार कार्य प्रणाली के चलते एक मां को अपने बेटे के कातिल को खुद ढूंढना पड़ा यह बेहद शर्मनाक है।

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