: लोहाघाट:वाल्मीकि समाज के सरपंच हरचरण करेंगे लोहाघाट नगर पालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी
Tue, May 28, 2024
वाल्मीकि समाज के सरपंच हरचरण करेंगे लोहाघाट नगर पालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी[caption id="attachment_20027" align="alignnone" width="300"]
उत्तराखंड वाल्मीकि समाज के सरपंच व वर्तमान में लोहाघाट नगर पालिका में तैनात हरचरण सिंह आगामी नगर पालिका चुनाव में लोहाघाट नगर पालिका से अध्यक्ष पद की दावेदारी करेंगे मंगलवार को हरचरण सिंह ने बताया 2024 निकाय चुनाव में अगर पालिका लोहाघाट में अनुसूचित जाति की सीट आती है तो वह नगरपालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी करेंगे हरचरण सिंह ने बताया उन्हें पालिका में कार्य करते हुए लगभग 40 साल हो चुके हैं और उन्हें पूरी जानकारी है नगर के विकास के लिए क्या-क्या कार्य करने हैं उन्होंने कहा पूर्व में पालिका में कुछ ऐसे कार्य हुए हैं जिन्हें नहीं होना चाहिए था जिस कारण जनता को काफी दिक्कतें हो रही है उन्होंने कहा अगर वह जनता के सहयोग से नगरपालिका अध्यक्ष बनते हैं तो वह नगर की तस्वीर बदलकर रख देंगे उन्हें इस कार्य में उनके 40 वर्ष का अनुभव काम आएगा उन्होंने नगर की जनता से हाथ जोड़कर सहयोग देने की अपील की है साथ ही उन्होंने कहा लोहाघाट नगर की प्रमुख समस्या पेयजल ,नजूल भूमि को फ्री होल्ड करना तथा लोहावती नदी को स्वच्छ करने की लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ेंगे अगर जरूरत पड़ी तो माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे वही पालिका में तैनात पर्यावरण मित्रों को सुविधाएं दिलाई जाएंगे ताकि नगर की स्वच्छता व्यवस्था और बेहतर हो सके पालिका के लिए नई-नई आधुनिक मशीने खरीदी जाएंगी वही लोगों ने कहा अगर एससी सीट आती हैं तो हरचरण सिंह नगर पालिका अध्यक्ष पद के सशक्त उम्मीदवार होंगे वही अपने सरपंच के इस फैसले पर वाल्मीकि समाज काफी जोश में है
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: लोहाघाट:मसहूर फुटबॉलर व उत्तराखंड पुलिस के एडिशनल एसआई खीम रावत का निधन
Tue, May 28, 2024
मसहूर फुटबॉलर व उत्तराखंड पुलिस के एडिशनल एसआई खीम रावत का निधन
लोहाघाट के मशहूर फुटबॉलर व उत्तराखंड पुलिस के एडिशनल एसआई खीम रावत(54 )का लंबी बीमारी से सोमवार रात 10:00 बजे अपने निवास स्थान मीना बाजार में निधन हो गया है खीम रावत के निधन से पूरे लोहाघाट क्षेत्र व चंपावत व पिथोरागढ़ पुलिस में शोक की लहर छा गई है वर्तमान में रावत पिथोरागढ़ में तैनात थे उनके द्वारा चम्पावत जिले मे भी लम्बे समय तक अपनी सेवा दी गई जानकारी के मुताबिक रावत लगभग पिछले एक वर्ष से बीमार चल रहे थे रावत अपने पीछे अपनी पत्नी व दो बच्चों को छोड़ गए हैं मंगलवार को रावत का अंतिम संस्कार रामेश्वर घाट में किया जाएगा जहा उनके पुत्र वीरेंद्र रावत व बड़े भाई कल्याण रावत के द्वारा उन्हें मुखाग्नि दी जाएगी अपने व्यवहार के चलते खीम रावत लोहाघाट क्षेत्र व पुलिस परिवार में काफी लोकप्रिय थे उनके निधन पर पूरे क्षेत्र के लोगों ने शोक जताया है मालूम हो खीम रावत अपने जमाने में फुटबॉल के मशहूर खिलाड़ी थे उनके द्वारा उत्तराखंड पुलिस टीम का कई बार प्रतिनिधित्व किया गया उनके निधन पर एसपी पिथौरागढ़ रेखा यादव,एसपी चंपावत अजय गणपति ,सीओ वंदना वर्मा , लोहाघाट थानाध्यक्ष अशोक कुमार ,राज्य आंदोलनकारी राजू गढ़कोटी , निवर्तमान पालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ,विधायक प्रतिनिधि चांद बोहरा ,कैलाश रावत ,व्यापार मंडल अध्यक्ष भैरव दत्त राय, हरी ओली,नवीन कुमार, हेड कांस्टेबल ललित रावल ,कांस्टेबल दया सहित कई लोगों ने दुख जताया है
: बाराकोट:मात्र आधे घंटे की बारिश रोड को बना दिया रौखड़
Mon, May 27, 2024
मात्र आधे घंटे की बारिश रोड को बना दिया रौखड़
बाराकोट, रविवार 26 में 2024 की शाम को आई मूसलाधार बारिश ने मात्र आधे घंटे में लड़ीधूरा मंदिर मोटर मार्ग को पूरी तरह रौखड़ में परिवर्तित कर दिया। मां लड़ीधुरा शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मंच अध्यक्ष नागेंद्र जोशी ने बताया इस नुकसान का प्रमुख कारण अक्टूबर 2021 में आई भीषण आपदा में गिरे हुए मलवे से नालियों एवं कलवटों का बंद होना है। जोशी ने कहा असल में विगत 3 वर्षों से विभाग द्वारा इस मोटर मार्ग की घोर अनदेखी की गई है। आपदा मद में करोड़ों रुपए का बजट आने के बाद भी अक्टूबर 2021 में गिरी हुई दीवार अब तक निर्मित नहीं की गई है।
वर्तमान में यह क्षतिग्रस्त मोटर मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बहुत बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है। जोशी ने कहा मेरा विभागीय अधिकारियों से करबद्ध निवेदन है कि अभिलंब संज्ञान लेते हुए इस मोटर मार्ग की मरम्मत का कार्य किया जाए,
बंद पड़ी हुई नालियों एवं कलवटों को खोला जाए ताकि भविष्य में होने वाली बरसात से मोटर मार्ग को और अधिक नुकसान ना हो तथा मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी संभावित दुर्घटनाओं से बचाए जा सके।इस मोटर मार्ग पर किए गए डामरीकरण की गुणवत्ता पर तद्समय ही सवाल उठाए गए थे, जिन्हें विभागीय अधिकारियों द्वारा 2 वर्ष तक ठेकेदार की पूर्ण जिम्मेदारी होने का हवाला देते हुए नकार दिया गया था