: चंपावत:मुख्यमंत्री की विधानसभा में अतिथि शिक्षकों का हो रहा आर्थिक शोषण अतिथि शिक्षकों ने लगाए गंभीर आरोप
Laxman Singh Bisht
Wed, Jul 3, 2024मुख्यमंत्री की विधानसभा में अतिथि शिक्षकों का हो रहा आर्थिक शोषण अतिथि शिक्षकों ने लगाए गंभीर आरोप
बुधवार 3 जुलाई को सुभाष गोस्वामी (जिला अध्यक्ष अतिथि शिक्षक संगठन/ गेस्ट टीचर चंपावत) के नेतृत्व में अतिथि शिक्षकों द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। संगठन जिला अध्यक्ष ने कहा चंपावत जनपद के अति दुर्गम विद्यालय में कार्यरत लगभग 200 अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय न दिए जाने से अतिथि शिक्षकों के सम्मुख आर्थिक संकट पैदा हो गया है उन्होंने कहा विगत 10 वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन शीतकालीन अवधि का मानदेय दिया जा रहा था जिस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा रोक लगा दी है वहीं जिला अध्यक्ष सुभाष गोस्वामी ने बताया जिस शासनादेश के तहत आज तक शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय निर्गत होता आया है मुख्य शिक्षा अधिकारी इस शासनादेश को अस्पष्ट बता रहे हैं उन्होंने कहा पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी आदेश में स्पष्ट कर चुके हैं कि शीतकालीन तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश सिक्षण अवधि के अंतर्गत आते हैं पर इसके बावजूद भी अतिथि शिक्षकों को इसअवधि का मानदेय आहरित नहीं किया जा रहा है उन्होंने कहा कहने को चंपावत जिला मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के साथ-साथ एक आदर्श जिला भी है लेकिन आदर्श जिले में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है यह उन लोगों ने कभी सोचा नहीं था उन्होंने कहा जिले के दुर्गम तथा अति दुर्गम विद्यालय में पूर्ण मनोयोग से कार्यरत अतिथि शिक्षकों ने प्रतिवर्ष परिषदीय परीक्षाओं उत्तराखंड बोर्ड में जिले को एक से बढ़कर एक मेधावी छात्र दिए हैं नोनिहालो का भविष्य संवारा है लेकिन आज 10 साल बाद भी शासन प्रशासन अतिथि शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है उन्होंने कहा जनपद चंपावत में करीब 70% अतिथि शिक्षक अन्य जिले से है। जो मात्र 25 हजार रूपए मासिक मानदेय पर कार्य कर रहे हैं जिनके समाने अब अपने परिवार का भरण पोषण करने की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिनको ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय न दिए जाने से अतिथि शिक्षकों के सम्मुख आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। जबकि विगत 10 वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन/ शीतकालीन अवधि का मानदेय दिया जा रहा था, परंतु इस बार मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा रोक लगा दी गई है। केवल मात्र जनपद चंपावत के ही अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन अवधि का वेतन न दिए जाने के लिखित आदेश जारी किए गए हैं। जिससे अतिथि शिक्षकों में रोष की भावना परिलक्षित हुई है। अतिथि शिक्षकों द्वारा ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन अवधि का वेतन विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी दिए जाने की मांग की गई है।इस दौरान प्रदीप गोस्वामी, चंचल कुमार, बसंत बोहरा, योगेश खर्कवाल, निर्मल कुमार, चंद्रशेखर पांडे आदि मौजूद रहे।
बुधवार 3 जुलाई को सुभाष गोस्वामी (जिला अध्यक्ष अतिथि शिक्षक संगठन/ गेस्ट टीचर चंपावत) के नेतृत्व में अतिथि शिक्षकों द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। संगठन जिला अध्यक्ष ने कहा चंपावत जनपद के अति दुर्गम विद्यालय में कार्यरत लगभग 200 अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय न दिए जाने से अतिथि शिक्षकों के सम्मुख आर्थिक संकट पैदा हो गया है उन्होंने कहा विगत 10 वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन शीतकालीन अवधि का मानदेय दिया जा रहा था जिस पर मुख्य शिक्षा अधिकारी के द्वारा रोक लगा दी है वहीं जिला अध्यक्ष सुभाष गोस्वामी ने बताया जिस शासनादेश के तहत आज तक शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय निर्गत होता आया है मुख्य शिक्षा अधिकारी इस शासनादेश को अस्पष्ट बता रहे हैं उन्होंने कहा पूर्व मुख्य शिक्षा अधिकारी आदेश में स्पष्ट कर चुके हैं कि शीतकालीन तथा ग्रीष्मकालीन अवकाश सिक्षण अवधि के अंतर्गत आते हैं पर इसके बावजूद भी अतिथि शिक्षकों को इसअवधि का मानदेय आहरित नहीं किया जा रहा है उन्होंने कहा कहने को चंपावत जिला मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र होने के साथ-साथ एक आदर्श जिला भी है लेकिन आदर्श जिले में कार्यरत अतिथि शिक्षकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है यह उन लोगों ने कभी सोचा नहीं था उन्होंने कहा जिले के दुर्गम तथा अति दुर्गम विद्यालय में पूर्ण मनोयोग से कार्यरत अतिथि शिक्षकों ने प्रतिवर्ष परिषदीय परीक्षाओं उत्तराखंड बोर्ड में जिले को एक से बढ़कर एक मेधावी छात्र दिए हैं नोनिहालो का भविष्य संवारा है लेकिन आज 10 साल बाद भी शासन प्रशासन अतिथि शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है उन्होंने कहा जनपद चंपावत में करीब 70% अतिथि शिक्षक अन्य जिले से है। जो मात्र 25 हजार रूपए मासिक मानदेय पर कार्य कर रहे हैं जिनके समाने अब अपने परिवार का भरण पोषण करने की समस्या उत्पन्न हो गई है। जिनको ग्रीष्मकालीन अवधि का मानदेय न दिए जाने से अतिथि शिक्षकों के सम्मुख आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। जबकि विगत 10 वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन/ शीतकालीन अवधि का मानदेय दिया जा रहा था, परंतु इस बार मुख्य शिक्षा अधिकारी द्वारा रोक लगा दी गई है। केवल मात्र जनपद चंपावत के ही अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन अवधि का वेतन न दिए जाने के लिखित आदेश जारी किए गए हैं। जिससे अतिथि शिक्षकों में रोष की भावना परिलक्षित हुई है। अतिथि शिक्षकों द्वारा ग्रीष्मकालीन/शीतकालीन अवधि का वेतन विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी दिए जाने की मांग की गई है।इस दौरान प्रदीप गोस्वामी, चंचल कुमार, बसंत बोहरा, योगेश खर्कवाल, निर्मल कुमार, चंद्रशेखर पांडे आदि मौजूद रहे।