रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:जान हथेली में रख घास काटने को मजबूर महिलाएं सीमांत क्षेत्र को नही मिल रहा घसियारी योजना का लाभ।
Laxman Singh Bisht
Mon, Jan 12, 2026
जान हथेली में रख घास काटने को मजबूर महिलाएं सीमांत क्षेत्र को नही मिल रहा घसियारी योजना का लाभ।
जान हथेली में रख ऊंचे पेड़ों व पहाड़ों से घास काटने को मजबूर महिलाएं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को जान खतरे में डालकर ऊंचे पहाड़ों व पेड़ों से घास काटने से निजात दिलाने के लिए मुख्यमंत्री घसियारी योजना प्रदेश में संचालित की गई है। योजना के तहत रियायती दरों में पशुपालकों को साइलेज उपलब्ध कराया जाता है। चंपावत जिले में भी काफी तादाद में पशुपालकों को साइलेज उपलब्ध कराया जा रहा है पर यह ब्लॉक के निकटवर्ती ग्रामों तक ही सीमित है। पर लोहाघाट विधानसभा के दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों को मुख्यमंत्री घसियारी योजना का लाभ पशुपालकों को नहीं मिल पा रहा है। लोहाघाट के सीमांत सुल्ला , पासम, नगरूघाट , रोसाल आदि क्षेत्र की महिलाएं अपने पशुओं के लिए चारा लाने के लिए आज भी अपनी जान खतरे में डालकर ऊंचे पेड़ों व पहाड़ों से घास काटने को मजबूर है जो उन्हें गिरने के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है। सीमांत क्षेत्र की महिलाओं ने बताया यहां उन्हें मुख्यमंत्री घसियारी योजना का लाभ नहीं मिलता है। जिस कारण वह जंगलों में जाकर ऊंचे पहाड़ों व पेड़ों में चढ़कर घास काटने को मजबूर है। उन्होंने शासन प्रशासन से मुख्यमंत्री घसियारी योजना का लाभ देने की मांग की है। मालूम हो ऊंचे पहाड़ों, पेड़ों से घास काटने के दौरान गिरकर कई महिलाओं की मौत हो जाती है या कई महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं।
लोगों ने शासन प्रशासन से अपील की है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के द्वारा चलाई गई इस जन कल्याणकारी योजना का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों को भी दिया जाए। जिससे आए दिन घास काटने के दौरान जंगली जानवरों के द्वारा की जाने वाली दुर्घटनाएं तथा पहाड़ों व पेड़ों से गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं में लगाम लगाई जा सके। मालूम हो यह योजना सहकारिता विभाग के सहयोग से संचालित की जाती है। योजनाओं का लाभ निकटवर्ती ग्राम सभाओं को ही वर्तमान में मिल पा रहा है।