: चंपावत:अमान्य प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रही जैरोली(पाटी )की शिक्षिका बर्खास्त
Laxman Singh Bisht
Thu, Feb 8, 2024
अमान्य प्रमाणपत्र पर नौकरी कर रही जैरोली की शिक्षिका बर्खास्त
चंपावत जिले के पाटी विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैरोली की सहायक अध्यापिका अपात्र होने के बाद भी बच्चों को पढ़ा रही थीं। एक साल बाद विभाग को अध्यापिका की अपात्रता का पता चला। मामला पकड़ में आने के बाद विभाग ने शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया है।वही चंपावत के मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह, ने बताया अध्यापक पात्रता परीक्षा प्रमाणपत्र की वैधता आजीवन किए जाने का शासनादेश 28 जून 2021 को जारी किया गया था। प्रथमदृष्टया अभ्यर्थी किरन लता चौहान की गलती सामने आई है। यदि महिला पात्र नहीं थी तो आवेदन नहीं करना चाहिए था। वर्ष 2022 में शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नवंबर 2023 तक उनकी तरफ से कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने पर अब उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका किरन लता चौहान की तैनाती एक साल पहले हुई थी। वह बच्चों को नियमित रूप से पढ़ा रही थी लेकिन अध्यापिका का पात्रता प्रमाणपत्र अमान्य था। अध्यापिका ने वर्ष 2011 के पात्रता प्रमाणपत्र के आधार पर 2020 में आवेदन किया था जबकि वैधता 15 सितंबर 2018 को समाप्त हो गई थी। विभाग ने दिसंबर 2020 में प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की थी।किरन ने भी आवेदन किया था। विभाग ने तब भी प्रमाणपत्रों की जांच की और उसे वर्ष 2022 मेंनियुक्ति दे दी। अध्यापिका को वेतन और अन्य भत्ते नियमित रूप से मिलते रहे। अप्रैल 2023 में निदेशक प्राथमिक शिक्षा को इस संबंध में एक शिकायती पत्र मिला। तब जाकर अध्यापिका की नियुक्ति को लेकर उचित कार्रवाई के निर्देश विभाग को दिए गए।इसके बाद शिक्षा विभाग ने अध्यापिका को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। निश्चित अवधि तक कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने के बाद शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया गया।
चंपावत जिले के पाटी विकासखंड के राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैरोली की सहायक अध्यापिका अपात्र होने के बाद भी बच्चों को पढ़ा रही थीं। एक साल बाद विभाग को अध्यापिका की अपात्रता का पता चला। मामला पकड़ में आने के बाद विभाग ने शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया है।वही चंपावत के मुख्य शिक्षा अधिकारी मेहरबान सिंह, ने बताया अध्यापक पात्रता परीक्षा प्रमाणपत्र की वैधता आजीवन किए जाने का शासनादेश 28 जून 2021 को जारी किया गया था। प्रथमदृष्टया अभ्यर्थी किरन लता चौहान की गलती सामने आई है। यदि महिला पात्र नहीं थी तो आवेदन नहीं करना चाहिए था। वर्ष 2022 में शिक्षिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नवंबर 2023 तक उनकी तरफ से कोई भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने पर अब उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका किरन लता चौहान की तैनाती एक साल पहले हुई थी। वह बच्चों को नियमित रूप से पढ़ा रही थी लेकिन अध्यापिका का पात्रता प्रमाणपत्र अमान्य था। अध्यापिका ने वर्ष 2011 के पात्रता प्रमाणपत्र के आधार पर 2020 में आवेदन किया था जबकि वैधता 15 सितंबर 2018 को समाप्त हो गई थी। विभाग ने दिसंबर 2020 में प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक पदों के लिए विज्ञप्ति जारी की थी।किरन ने भी आवेदन किया था। विभाग ने तब भी प्रमाणपत्रों की जांच की और उसे वर्ष 2022 मेंनियुक्ति दे दी। अध्यापिका को वेतन और अन्य भत्ते नियमित रूप से मिलते रहे। अप्रैल 2023 में निदेशक प्राथमिक शिक्षा को इस संबंध में एक शिकायती पत्र मिला। तब जाकर अध्यापिका की नियुक्ति को लेकर उचित कार्रवाई के निर्देश विभाग को दिए गए।इसके बाद शिक्षा विभाग ने अध्यापिका को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया। निश्चित अवधि तक कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने के बाद शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया गया।