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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : चम्पावत में धारे-नौलों के संरक्षण की पहल, जनसहभागिता से होगा कायाकल्प :डीएम

Laxman Singh Bisht

Sat, Apr 25, 2026

“चम्पावत में धारे-नौलों के संरक्षण की पहल, जनसहभागिता से होगा कायाकल्प”

“धरोहर और जल संरक्षण का संगम: चम्पावत में धारे-नौलों के पुनर्जीवन की तैयारी, जनता से मांगे सुझाव”

जनपद चम्पावत में ऐतिहासिक, पौराणिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में उत्तराखण्ड शासन की मंशा अनुसार अब जनपद के प्राचीन धारे-नौलों का सुनियोजित कायाकल्प किया जाएगा।स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA) के माध्यम से राज्य में प्राकृतिक जल स्रोतों एवं वर्षा आधारित नदियों के पुनर्जीवीकरण हेतु संचालित अभियान के तहत इन पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल संरचनात्मक जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके कैचमेंट एरिया के वैज्ञानिक उपचार के माध्यम से जल स्रोतों की सततता और जल स्तर की स्थिरता सुनिश्चित करना भी है।जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अवगत कराया कि मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड शासन द्वारा उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के क्रम में जनपद के ऐसे धारे-नौलों की पहचान एवं सूची तैयार की जा रही है, जिनका ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं पौराणिक महत्व विशेष रहा है। चयनित स्थलों के लिए चालू वित्तीय वर्ष में विस्तृत उपचार कार्ययोजना (कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान) तैयार कर चरणबद्ध रूप से पुनर्निर्माण एवं संरक्षण कार्य प्रारंभ किए जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगी, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए शुद्ध पेयजल के स्थायी स्रोत भी सुनिश्चित करेगी।इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिलाधिकारी ने जनपदवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्ध नागरिकों से सक्रिय सहभागिता की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासी अपने क्षेत्र के ऐसे उपेक्षित या क्षतिग्रस्त धारे-नौलों की जानकारी एवं सुझाव प्रशासन के साथ साझा करें,

जिनका संरक्षण आवश्यक है। प्राप्त सुझावों के आधार पर जनपद के पाँच सर्वाधिक प्राथमिकता वाले अति-महत्वपूर्ण धारे-नौलों का चयन किया जाएगा।

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