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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:रायनगर चौड़ी की मीना ने हाथों की कला को बनाया कमाई का जरिया

Laxman Singh Bisht

Tue, Apr 28, 2026

रायनगर चौड़ी की मीना ने हाथों की कला को बनाया कमाई का जरिया

ऐपण कला से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं मीना राय

लोहाघाट।उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर ऐपण कला को आजीविका का सशक्त माध्यम बनाकर ग्राम पंचायत चौड़ीराय की निवासी श्रीमती मीना राय पारंपरिक कला के प्रति बचपन से ही गहरी रुचि और दक्षता रखती थी। मीना के पास हुनर तो था, लेकिन संसाधनों और उचित मार्गदर्शन के अभाव में वह इसे व्यवसायिक रूप नहीं दे पा रही थीं।उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव तब आया जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित ‘जय माँ काली स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं। यह समूह ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत ‘मनसा देवी संकुल संघ’ द्वारा संचालित किया जा रहा है। समूह से जुड़ने के बाद मीना को न केवल सामूहिक सहयोग मिला, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के नए अवसरों की भी जानकारी प्राप्त हुई।ग्रामोत्थान परियोजना, जो कि आईफैड और केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित है, ने मीना राय के उद्यम को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।परियोजना के तहत आयोजित बैठकों के माध्यम से उन्हें लघु उद्यम स्थापना योजना की जानकारी मिली। उनकी लगन और आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को देखते हुए परियोजना टीम ने ऐपण कला आधारित उद्यम के लिए उनका चयन किया तथा सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण कराईं।

उद्यम की स्थापना हेतु मीना राय को कुल एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसमें 30 हजार रुपये की अनुदान राशि, 50 हजार रुपये का बैंक ऋण तथा 20 हजार रुपये का स्वयं का अंशदान शामिल रहा। इस आर्थिक सहयोग ने उनके सपनों को साकार करने की मजबूत नींव रखी।अपने उद्यम की शुरुआत में मीना ने पारंपरिक ऐपण डिजाइनों को आधुनिकता के साथ जोड़ते हुए पूजा थाली, वॉल हैंगिंग, उपहार सामग्री और नाम पट्टिका जैसे आकर्षक उत्पाद तैयार किए। उनकी कलाकारी और उत्पादों की गुणवत्ता के कारण स्थानीय बाजार में उन्हें शीघ्र ही पहचान मिल गई और मांग लगातार बढ़ने लगी।

आज श्रीमती मीना राय अपने इस स्वरोजगार से प्रतिमाह लगभग 5 से 6 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि अपनी पारंपरिक कला को संरक्षित करते हुए अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।

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