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लोहाघाट:परियोजना ने बदली तकदीर अब आत्मनिर्भरता की राह पर हेमा राय

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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : लोहाघाट:परियोजना ने बदली तकदीर अब आत्मनिर्भरता की राह पर हेमा राय

Laxman Singh Bisht

Sat, May 2, 2026

परियोजना ने बदली तकदीर अब आत्मनिर्भरता की राह पर हेमा राय

जनपद चम्पावत की ग्राम पंचायत चौड़ीराय की निवासी श्रीमती हेमा राय आज ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वावलंबन की एक नई मिसाल बन चुकी हैं। एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली हेमा राय ने सीमित संसाधनों और पारंपरिक आजीविका के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने का जो संकल्प लिया था, उसे 'ग्रामोत्थान परियोजना' ने नई उड़ान दी है। गाँव में एनआरएलएम के तहत गठित 'कालसन बाबा स्वयं सहायता समूह' की सदस्य हेमा के पास पूर्व में केवल दो गायें थीं, जिनसे होने वाला दूध उत्पादन परिवार की बुनियादी जरूरतों के लिए भी बमुश्किल पर्याप्त था। आय का कोई स्थायी स्रोत न होने और आर्थिक तंगी के कारण वे अपने पशुपालन व्यवसाय को बढ़ाने में असमर्थ महसूस कर रही थीं।इसी बीच आईएफएडी (IFAD) और केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित 'ग्रामोत्थान परियोजना' की टीम ने ग्राम चौड़ीराय में बैठकों का आयोजन किया। इन बैठकों के माध्यम से हेमा को परियोजना के अंतर्गत संचालित 'लघु उद्यम स्थापना योजना' की विस्तृत जानकारी मिली। परियोजना के अधिकारियों ने उन्हें न केवल आर्थिक सहायता बल्कि बैंक ऋण और लाभार्थी अंशदान की प्रक्रिया के बारे में भी प्रेरित किया। उचित मानको पर खरा उतरने के बाद, परियोजना द्वारा हेमा का चयन गाय पालन उद्यम के लिए किया गया। इसके तहत तीन लाख रुपये के कुल निवेश वाला प्रोजेक्ट तैयार किया गया, जिसमें परियोजना की ओर से 75,000 रुपये का अनुदान, 1.50 लाख रुपये का बैंक ऋण और 75,000 रुपये का व्यक्तिगत अंशदान शामिल रहा।

इस वित्तीय सहयोग का लाभ उठाते हुए हेमा ने तीन नई गायें खरीदीं, जिससे अब उनके पास कुल पाँच गायें हो गई हैं। उन्होंने पशुओं के बेहतर चारा प्रबंधन और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना शुरू किया, जिसका परिणाम उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया। वर्तमान में हेमा प्रतिदिन लगभग 24 लीटर दूध का उत्पादन कर रही हैं, जिसे स्थानीय बाजारों और डेयरी केंद्रों में बेचकर वे अच्छी आय प्राप्त कर रही हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने दूध से मूल्य संवर्धन करते हुए प्रतिमाह लगभग 10-12 किलोग्राम घी तैयार करना भी शुरू किया है, जो 1000 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है।आज सभी खर्चों को निकालने के बाद हेमा राय प्रतिमाह 10,000 से 12,000 रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। यह आय उनके परिवार के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक आधार बन चुकी है। हेमा की यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और समय पर वित्तीय सहायता मिले, तो ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पलायन जैसी समस्याओं को रोककर समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी ला सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि ने गाँव की अन्य महिलाओं के भीतर भी स्वरोजगार के प्रति नया उत्साह और आत्मविश्वास जगाया है।

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