: कोटद्वार:शहीद का पार्थिव शरीर घर लाने की मांग। 72 घंटे बीत जाने के बाद भी नही पहुंचा शहीद का शव लोगो में आक्रोश
Laxman Singh Bisht
Sat, Dec 23, 2023शहीद का पार्थिव शरीर घर लाने की मांग। 72 घंटे बीत जाने के बाद भी नही पहुंचा शहीद का शव लोगो में आक्रोश
पुंछ राजौरी आतंकी हमले में सेना के चार जवान शहीद हुए हैं जिसमें कोटद्वार के गौतम सिंह ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है राजौरी पुंछ में आतंकियों से लोहा लेते हुए कोटद्वार निवासी 28 वर्षीय सेना के जवान गौतम सिंह भी शहीद हुए हैं गौतम सिंह आर्म्ड रेजीमेंट में तैनात थे गौतम सिंह 2014 में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे. शहीद गौतम कोटद्वार के शिवपुर इलाके के रहने वाले थे 11 मार्च को उनकी शादी होने वाली थी गोतम की शहादत की खबर के बाद से ही क्षेत्र में गम का माहौल है. गौतम के परिवार में कोहराम मचा हुआ है. शहीद जवान गौतम के घर गांव व रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है
वही 72 घंटे बीत जाने के बाद भी शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर पर नहीं पंहुच सका है और सैन्य अधिकारियों के द्वारा शहीद के परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा है कि उनके लिए हेलिकाप्टर भेजा जा रहा है और उनके परिवार के लोग राजौरी जाकर पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दे जबकि शहीद के परिजन पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ कोटद्वार लाने की मांग कर रहे है
तथा सेना के इस रवैया के चलते शहिद के परिजनों व क्षेत्र वासियों में काफी आक्रोश है शहीद के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 72 घंटेै बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई नुमाइंदा शहीद के परिजनों को सांत्वना देने नहीं पहुंचा।
पुंछ राजौरी आतंकी हमले में सेना के चार जवान शहीद हुए हैं जिसमें कोटद्वार के गौतम सिंह ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है राजौरी पुंछ में आतंकियों से लोहा लेते हुए कोटद्वार निवासी 28 वर्षीय सेना के जवान गौतम सिंह भी शहीद हुए हैं गौतम सिंह आर्म्ड रेजीमेंट में तैनात थे गौतम सिंह 2014 में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे. शहीद गौतम कोटद्वार के शिवपुर इलाके के रहने वाले थे 11 मार्च को उनकी शादी होने वाली थी गोतम की शहादत की खबर के बाद से ही क्षेत्र में गम का माहौल है. गौतम के परिवार में कोहराम मचा हुआ है. शहीद जवान गौतम के घर गांव व रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है
वही 72 घंटे बीत जाने के बाद भी शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर पर नहीं पंहुच सका है और सैन्य अधिकारियों के द्वारा शहीद के परिजनों पर दबाव बनाया जा रहा है कि उनके लिए हेलिकाप्टर भेजा जा रहा है और उनके परिवार के लोग राजौरी जाकर पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कर दे जबकि शहीद के परिजन पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ कोटद्वार लाने की मांग कर रहे है
तथा सेना के इस रवैया के चलते शहिद के परिजनों व क्षेत्र वासियों में काफी आक्रोश है शहीद के परिजनों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि 72 घंटेै बीत जाने के बाद भी प्रशासन का कोई नुमाइंदा शहीद के परिजनों को सांत्वना देने नहीं पहुंचा।