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रिपोर्ट:लक्ष्मण बिष्ट : नैनीताल:कुमाऊं यूनिवर्सिटी में पूर्व छात्रा के आरोपों से मचा सियासी बवाल।

Laxman Singh Bisht

Mon, Aug 31, 2026

कुमाऊं विश्वविद्यालय में पूर्व छात्रा के आरोपों से मचा सियासी बवाल

हाल ही में कुमाऊं यूनिवर्सिटी का एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें एक पूर्व छात्रा ने हरासमेंट के आरोप वाइस चांसलर पर लगाए हैं जिसकी छात्रा द्वारा शिकायत सीएम पोर्टल पर की जा चुकी है और नैनीताल पुलिस ने इस पर बयान भी दर्ज किये हैं लेकिन अभी तक पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज नहीं की है और जिस दिन की घटना है उसी दिन के सीसीटीवी भी सुरक्षित नहीं किए गए हैं क्या कारण हो सकते है?

*जाने पूरा मामला क्या है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय की एक पूर्व छात्रा द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सवालों के घेरे में है।छात्रा का आरोप है कि उसके अंकों को लेकर उसने विश्वविद्यालय के उप कुलपति से संपर्क किया था इसी दौरान कुलपति की ओर से कथित तौर पर उससे पूछा गया“मार्क्स के लिए तुम क्या कर सकती हो?”छात्रा के इस दावे ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि छात्रा की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बातचीत हुई थी तो उसमें वास्तव में क्या कहा गया था और इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए छात्रा अब सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग कर रही है।आरोप लगा रही छात्रा का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज इस मामले में महत्वपूर्ण सबूत हो सकती है छात्रा की मांग है कि जिस समय वह कुलपति से मिलने पहुंची थी, उस समय की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सामने लाई जाए।यहां यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि सीसीटीवी आमतौर पर बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड करे, यह जरूरी नहीं है इसलिए केवल सीसीटीवी फुटेज से बातचीत में कहे गए शब्दों की पुष्टि हो पाएगी या नहीं, यह रिकॉर्डिंग की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा लेकिन फुटेज से कम से कम यह स्पष्ट हो सकता है कि छात्रा और संबंधित अधिकारी के बीच मुलाकात हुई थी या नहीं और उस दौरान घटनाक्रम क्या था इसी वजह से छात्रा विश्वविद्यालय से फुटेज को सार्वजनिक करने की मांग कर रही है एक तरफ छात्रा गंभीर आरोप लगा रही है, दूसरी तरफ आरटीआई के बाद मार्कशीट में अंक बढ़ने का दावा भी किया जा रहा है ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच ही सबसे बड़ा रास्ता नजर आता है क्योंकि अगर अंक नियमों के तहत बढ़े हैं तो विश्वविद्यालय को पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करके स्थिति साफ करनी चाहिए और अगर नियमों से हटकर कोई बदलाव हुआ है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए अब यह मामला विश्वविद्यालय परिसर से निकलकर राजनीति के गलियारों तक पहुंच गया है। वहीं इस पर कांग्रेस के नेताओं का कहना है पीडित छात्रा के आरोपों पर सवाल खड़े करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाबदेही की मांग की है सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए गए हैं यानी मुद्दा अब राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा का विषय बन चुका है।

मामले में कांग्रेस का कहना है विश्वविद्यालय जैसी संस्था में छात्रों के साथ पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था होनी चाहिए अगर किसी छात्रा ने कुलपति पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाए हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को आरोपों को नजरअंदाज करने के बजाय पूरे मामले की जांच करानी चाहिए कांग्रेस की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि अगर विश्वविद्यालय प्रशासन के पास पूरे मामले को लेकर कोई आपत्ति नहीं है, तो सीसीटीवी और संबंधित रिकॉर्ड के जरिए स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?

तो वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है अगर छात्रा के आरोप गलत हैं तो विश्वविद्यालय प्रशासन को तथ्यों के साथ सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं अगर आरोपों में सच्चाई है तो मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए यानी राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच अब विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका और उसका आधिकारिक पक्ष बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय का यह मामला अब सिर्फ एक छात्रा और उसके अंकों तक सीमित नहीं रह गया है एक तरफ पूर्व छात्रा कुलपति पर गंभीर आरोप लगा रही है। दूसरी तरफ छात्रा का दावा है कि आरटीआई के बाद उसकी मार्कशीट में अंक बढ़े वहीं राजनीतिक दल भी मामले को लेकर सवाल उठा रहे हैं ऐसे में सबसे जरूरी है कि आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर दस्तावेज, सीसीटीवी रिकॉर्ड, परीक्षा संबंधी रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रक्रिया सामने आए अगर छात्रा के आरोप गलत हैं तो तथ्य सामने आने चाहिए और अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए फिलहाल निगाहें कुमाऊं विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक जवाब और इस मामले में होने वाली जांच पर टिकी हैं।

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