: लोहाघाट की रिश्वेश्वर मंदिर समिति की याचिका पर कोर्ट ने मंदिर परिसर में बाद के दौरान यथा स्थिति बनाने के दिए निर्देश मंदिर समिति के द्वारा बाबा मोहनानंद के खिलाफ याचिका कोर्ट में करी गई है दायर
Laxman Singh Bisht
Fri, Dec 22, 2023लोहाघाट की रिश्वेश्वर मंदिर समिति की याचिका पर कोर्ट ने मंदिर परिसर में बाद के दौरान यथा स्थिति बनाने के दिए निर्देश मंदिर समिति के द्वारा बाबा मोहनानंद के खिलाफ याचिका कोर्ट में करी गई है दायर
लोहाघाट की रिसेश्वर प्रबंधन समिति व बाबा मोहनानंद तीर्थ उर्फ एम के तिवारी के बीच धर्मशाला को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चंपावत न्यायालय पहुंच गया जहां रिशेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के द्वारा बाबा मोहनानंद के खिलाफ माननीय न्यायालय चंपावत में बाबा मोहनानंद के द्वारा मंदिर परिसर व धर्मशाला के सिलापटों में तोड़फोड़ व सुरक्षा दीवार को तोड़ने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर करी थी माननीय न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने आदेश देते हुए कहा बादी का प्रार्थना पत्र सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 इस आशय के दौरान स्वीकार किया जाता है कि पक्षकार दौराने बाद वादग्रस्त संपत्ति तहत वादपत्र पर यथा स्थिति बनाए रखें यानि कि बाद की सुनवाई के दौरान कोई भी पक्ष वाद स्थल पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ व निर्माण कार्य नहीं करेगा
वही मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता ने कहा वह माननीय न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं तथा माननीय न्यायालय को धन्यवाद देते हैं उन्होंने मंदिर समिति की याचिका को स्वीकार करा है वही बाबा मोहनानंद तीर्थ ने न्यायालय में अपने अधिवक्ता के जरिए बादपत्र में कहा है उनके द्वारा मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं करी गई है ना ही किसी धार्मिक कार्य में कोई बाधा पहुंचाई गई है मंदिर सभी लोगों का है फिलहाल मामला एक बार फिर से न्यायालय में चला गया है अब देखना है न्यायालय का फैसला बाबा के पक्ष में आता है या मंदिर समिति के
लोहाघाट की रिसेश्वर प्रबंधन समिति व बाबा मोहनानंद तीर्थ उर्फ एम के तिवारी के बीच धर्मशाला को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चंपावत न्यायालय पहुंच गया जहां रिशेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति के द्वारा बाबा मोहनानंद के खिलाफ माननीय न्यायालय चंपावत में बाबा मोहनानंद के द्वारा मंदिर परिसर व धर्मशाला के सिलापटों में तोड़फोड़ व सुरक्षा दीवार को तोड़ने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर करी थी माननीय न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिका पर सुनवाई करते हुए माननीय न्यायालय ने आदेश देते हुए कहा बादी का प्रार्थना पत्र सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 इस आशय के दौरान स्वीकार किया जाता है कि पक्षकार दौराने बाद वादग्रस्त संपत्ति तहत वादपत्र पर यथा स्थिति बनाए रखें यानि कि बाद की सुनवाई के दौरान कोई भी पक्ष वाद स्थल पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ व निर्माण कार्य नहीं करेगा
वही मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता ने कहा वह माननीय न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं तथा माननीय न्यायालय को धन्यवाद देते हैं उन्होंने मंदिर समिति की याचिका को स्वीकार करा है वही बाबा मोहनानंद तीर्थ ने न्यायालय में अपने अधिवक्ता के जरिए बादपत्र में कहा है उनके द्वारा मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं करी गई है ना ही किसी धार्मिक कार्य में कोई बाधा पहुंचाई गई है मंदिर सभी लोगों का है फिलहाल मामला एक बार फिर से न्यायालय में चला गया है अब देखना है न्यायालय का फैसला बाबा के पक्ष में आता है या मंदिर समिति के