: लोहाघाट नगर में दूषित पेयजल की आपूर्ति पर लोगों में सरकार व प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश आखिर कब जागेगी सरकार?
Laxman Singh Bisht
Tue, Mar 26, 2024
लोहाघाट नगर में दूषित पेयजल की आपूर्ति पर लोगों में सरकार व प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश आखिर कब जागेंगे लोग?
लोहाघाट नगर में जलसंस्थान के द्वारा बरसो से लोहावती नदी का दूषित जल पेयजल के तौर पर नगर वासियों को दिया जा रहा है जिस कारण नगर वासियों में सरकार व प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश है मंगलवार को राज्य आंदोलनकारी राजू गढ़कोटी वह सामाजिक कार्यकर्ता दीपक मेहता ने कहा लोहावती नदी पूरी तरह दूषित हो चुकी है
पूरे नगर की गंदगी और सीवर लोहावती नदी में बहता है इसके अलावा सवदाह की गंदगी भी इसी नदी में बहती है नदी में गंदगी से झाग पैदा हो गई है और जल संस्थान के द्वारा इसी बेहद गंदे हो चूके दूषित पानी को नगर वासियों को पेयजल के तौर पर दिया जाता है जिस कारण नगर वासी पीलिया टाइडफाइड व पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं और सरकार व प्रशासन इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं
नगर के लिए कोई दूसरी पेयजल योजना तक नहीं है दूषित पेयजल भी लोगों को तीन से चार दिन में नसीब होता है उन्होंने कहा प्रशासन व सरकार को इस समस्या पर गंभीर होना चाहिए तथा नगर वासियों के लिए सरयू लिफ्ट पेयजल योजना या कोली झील से पेयजल योजना का जल्द निर्माण करना चाहिए पर अभी इस ओर किसी भी प्रकार की पहल होती नजर नहीं आ रही है
वही जल संस्थान का कहना है नगर के लिए सिर्फ यही 40 साल पुरानी पेयजल योजना है जिससे काफी कम मात्रा में पानी मिल पाता है आखिर जल संस्थान पानी की आपूर्ति करें भी तो कहां से करें लोगों ने कहा सरकार को लोहाघाट नगर की सबसे बड़ी समस्या साफ पेयजल के लिए गंभीर होना चाहिए किसी बड़ी पेयजल योजना का जल्द निर्माण करना चाहिए वही नगरवासी भी दबी जुबान से इसे सबसे बड़ी समस्या मानते हैं
पर आवाज उठाने को कोई तैयार नहीं है जनप्रतिनिधि भी सोए पड़े हैं हां कभी कभार एक दो बयान इस समस्या को लेकर दे देते हैं पर गंभीर कोई नहीं है संपन्न लोगों के द्वारा अपने निज संसाधनों से बोरिंग कर ली गई है पर मध्यमवर्गीय व गरीब लोग इसी दूषित पानी को पीने को मजबूर है या किलोमीटर दूर जाकर नौलाधारों से पानी ढोते नज़र आते है हां पालिका के द्वारा नगर में सोलर हैंड पंप बनाकर नगर वासियों को जरूर कुछ राहत दी गई है
अगर जल्द सरकार ने लोहाघाट नगर के लिए पेयजल योजना का निर्माण नहीं कराया तो वह दिन दूर नहीं जब नगर के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते नजर आएंगे समय आ गया है अब नगर वासी जागे और एक सुर में सरकार से साफ पेयजल की मांग करें पर लोग कब जाएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन सरकार व प्रशासन को जगाने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की जरूरत है
पर वह दिन कब आएगा जब लोहाघाट नगर की जनता नींद से जागेगी और जगाएगा तो कौन जगाएगा? कुल मिलाकर लोहावती नदी को दूषित करने में सबसे बड़ा हाथ खुद नगर वासियों का भी है क्योंकि जो हम लोहावती को दे रहे हैं वह हमें वापस लौटा रही है

लोहाघाट नगर में जलसंस्थान के द्वारा बरसो से लोहावती नदी का दूषित जल पेयजल के तौर पर नगर वासियों को दिया जा रहा है जिस कारण नगर वासियों में सरकार व प्रशासन के खिलाफ काफी आक्रोश है मंगलवार को राज्य आंदोलनकारी राजू गढ़कोटी वह सामाजिक कार्यकर्ता दीपक मेहता ने कहा लोहावती नदी पूरी तरह दूषित हो चुकी है
पूरे नगर की गंदगी और सीवर लोहावती नदी में बहता है इसके अलावा सवदाह की गंदगी भी इसी नदी में बहती है नदी में गंदगी से झाग पैदा हो गई है और जल संस्थान के द्वारा इसी बेहद गंदे हो चूके दूषित पानी को नगर वासियों को पेयजल के तौर पर दिया जाता है जिस कारण नगर वासी पीलिया टाइडफाइड व पेट संबंधी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं और सरकार व प्रशासन इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं
नगर के लिए कोई दूसरी पेयजल योजना तक नहीं है दूषित पेयजल भी लोगों को तीन से चार दिन में नसीब होता है उन्होंने कहा प्रशासन व सरकार को इस समस्या पर गंभीर होना चाहिए तथा नगर वासियों के लिए सरयू लिफ्ट पेयजल योजना या कोली झील से पेयजल योजना का जल्द निर्माण करना चाहिए पर अभी इस ओर किसी भी प्रकार की पहल होती नजर नहीं आ रही है
वही जल संस्थान का कहना है नगर के लिए सिर्फ यही 40 साल पुरानी पेयजल योजना है जिससे काफी कम मात्रा में पानी मिल पाता है आखिर जल संस्थान पानी की आपूर्ति करें भी तो कहां से करें लोगों ने कहा सरकार को लोहाघाट नगर की सबसे बड़ी समस्या साफ पेयजल के लिए गंभीर होना चाहिए किसी बड़ी पेयजल योजना का जल्द निर्माण करना चाहिए वही नगरवासी भी दबी जुबान से इसे सबसे बड़ी समस्या मानते हैं
पर आवाज उठाने को कोई तैयार नहीं है जनप्रतिनिधि भी सोए पड़े हैं हां कभी कभार एक दो बयान इस समस्या को लेकर दे देते हैं पर गंभीर कोई नहीं है संपन्न लोगों के द्वारा अपने निज संसाधनों से बोरिंग कर ली गई है पर मध्यमवर्गीय व गरीब लोग इसी दूषित पानी को पीने को मजबूर है या किलोमीटर दूर जाकर नौलाधारों से पानी ढोते नज़र आते है हां पालिका के द्वारा नगर में सोलर हैंड पंप बनाकर नगर वासियों को जरूर कुछ राहत दी गई है
अगर जल्द सरकार ने लोहाघाट नगर के लिए पेयजल योजना का निर्माण नहीं कराया तो वह दिन दूर नहीं जब नगर के लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते नजर आएंगे समय आ गया है अब नगर वासी जागे और एक सुर में सरकार से साफ पेयजल की मांग करें पर लोग कब जाएंगे कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन सरकार व प्रशासन को जगाने के लिए एक बड़े जन आंदोलन की जरूरत है
पर वह दिन कब आएगा जब लोहाघाट नगर की जनता नींद से जागेगी और जगाएगा तो कौन जगाएगा? कुल मिलाकर लोहावती नदी को दूषित करने में सबसे बड़ा हाथ खुद नगर वासियों का भी है क्योंकि जो हम लोहावती को दे रहे हैं वह हमें वापस लौटा रही है
