: चंपावत:सात गवाह पेश किए मगर आरोप सिद्ध नहीं कर पाई चम्पावत पुलिस स्मैक तस्करी के आरोपी को सीजेएम कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर बरी कियापुलिस की कार्यप्रणाली पर कोर्ट ने उठाए सवाल, 2018 का है प्रकरण
Laxman Singh Bisht
Sun, Dec 17, 2023सात गवाह पेश किए मगर आरोप सिद्ध नहीं कर पाई पुलिस
विशेष सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने स्मैक तस्करी के एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। सात गवाह पेश करने के बाद भी कोर्ट में चम्पावत पुलिस संबंधित के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा पुलिस ने आरोपी से बरामद स्मैक को बांट माप विभाग से सत्यापित तराजू पर नहीं तौला और न ही जनता से कोई गवाह पुलिस जुटा सकी।मामला जनवरी 2018 का है। पुलिस के मुताबिक आरोपी भजनपुर निवासी त्रिभुवन भट्ट से 5.02 ग्राम स्मैक बरामद की गई थी। सीजेएम कोर्ट में मामला चला। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। गवाह व साक्ष्यों को ध्यान में रखकर सीजेएम कहकशा खान ने फैसले में कहा कि पुलिस ने बरामद स्मैक को 5.02 ग्राम बताया है। न्यायालय में दो तराजू में तौलने पर ही बरामद मात्रा में 0.02 ग्राम का अंतर मिला। 5.0 ग्राम व 5.02 ग्राम के मध्य मामूली अंतर का इसलिए अधिक महत्व है क्योंकि एनडीपीएस एक्ट में 5.0 ग्राम तक की मात्रा मामूली श्रेणी में आती है। 250 ग्राम तक को मध्यम मात्रा माना गया है। तर्क दिया कि महज 0.02 ग्राम मात्रा से ही मामला 10 वर्ष तक की कठोर कारावास की श्रेणी में आ जाता है, जबकि पांच ग्राम तक की मात्रा में अधिकतम एक वर्ष कारावास का प्रविधान है। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एससी गड़कोटी व अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।
विशेष सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने स्मैक तस्करी के एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया। सात गवाह पेश करने के बाद भी कोर्ट में चम्पावत पुलिस संबंधित के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं कर पाई। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा पुलिस ने आरोपी से बरामद स्मैक को बांट माप विभाग से सत्यापित तराजू पर नहीं तौला और न ही जनता से कोई गवाह पुलिस जुटा सकी।मामला जनवरी 2018 का है। पुलिस के मुताबिक आरोपी भजनपुर निवासी त्रिभुवन भट्ट से 5.02 ग्राम स्मैक बरामद की गई थी। सीजेएम कोर्ट में मामला चला। अभियोजन पक्ष ने सात गवाह पेश किए। गवाह व साक्ष्यों को ध्यान में रखकर सीजेएम कहकशा खान ने फैसले में कहा कि पुलिस ने बरामद स्मैक को 5.02 ग्राम बताया है। न्यायालय में दो तराजू में तौलने पर ही बरामद मात्रा में 0.02 ग्राम का अंतर मिला। 5.0 ग्राम व 5.02 ग्राम के मध्य मामूली अंतर का इसलिए अधिक महत्व है क्योंकि एनडीपीएस एक्ट में 5.0 ग्राम तक की मात्रा मामूली श्रेणी में आती है। 250 ग्राम तक को मध्यम मात्रा माना गया है। तर्क दिया कि महज 0.02 ग्राम मात्रा से ही मामला 10 वर्ष तक की कठोर कारावास की श्रेणी में आ जाता है, जबकि पांच ग्राम तक की मात्रा में अधिकतम एक वर्ष कारावास का प्रविधान है। संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एससी गड़कोटी व अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने पैरवी की।