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: लोहाघाट:देश के लिए 6 महीने चीन में काटी जेल अंतिम गोली तक लड़े 1962 के जांबाज योद्धा हयाद सिंह मेहता कई चीनियों को उतारा मौत के घाट

Laxman Singh Bisht

Wed, Sep 11, 2024
देश के लिए 6 महीने चीन में काटी जेल अंतिम गोली तक लड़े 1962 के जांबाज योद्धा हयाद सिंह मेहता कई चीनियों को उतारा मौत के घाट बात सन 1962 की है जब चीन ने पूरी तैयारी के साथ अचानक भारत पर हमला कर दिया चीन द्वारा अचानक किए गए हमले के लिए देश तैयार नहीं था वही असम के चीन बॉर्डर में भारत की पायनर कंपनी में एक 18 वर्ष का युवा सिपाही हयाद सिंह मेहता तैनात था जिनके युवा खून में देशभक्ति का जज्बा कूट-कूट कर भरा था हयाद सिंह के द्वारा इस भयंकर लड़ाई में कई चीनियों को मौत के घाट उतारा गया तथा 6 महीना चीन में उनके द्वारा जेल काटी गई आज 84 वर्ष के हो चुके लोहाघाट के कलीगांव निवासी हयाद सिंह मेहता में वही देशभक्ति का जज्बात बरकरार उन्होंने 1962 की लड़ाई का हाल सुनाते हुए कहा वह पाईनर कंपनी में नए-नए भर्ती हुए थे ट्रेनिंग के बाद उनकी पोस्टिंग असम के चीन बॉर्डर में कर दी गई उनकी कंपनी में 100 जवान तैनात थे मेहता ने बताया 1962 में चीन ने अचानक भारत मे हमला कर दिया और चीनी सैनिकों ने जिनकी तादाद एक हजार से भी अधिक थी अचानक उनकी पोस्ट पर जोरदार हमला कर दिया हमारी सेना के पास गोला बारूद काफी कम था लेकिन हम लोग काफी बहादुरी से लड़े लेकिन चीनी सैनिकों की तादाद काफी ज्यादा थी उन्होंने कहा काफी भयंकर लड़ाई वहां पर हुई हम लोगों ने काफी ज्यादा चीनी सैनिकों को मार गिराया तथा हमारी पलटन के भी कई जवान शहीद हो गए तथा कई घायल हुए जांबाज हयाद सिंह मेहता ने बताया कई घंटे की लड़ाई के बाद हमारा गोला बारूद खत्म हो गया था खाने के लिए कुछ नहीं था हाई कमान ने पल्टन को पोस्ट छोड़ने का आर्डर दिया इसके बाद मजबूरी में हमें पोस्ट छोड़नी पड़ी उन्होंने बताया वह आठ सैनिक थे जो 14 दिन तक भूखे प्यासे जंगलों में भटकते रहे उन्होंने कहा है इस दौरान उन लोगों के द्वारा जंगलों में घास पत्ते खाकर किसी तरह काम चलाया गया कभी घर छोड़कर भाग चुके लामा लोगों के घरों में बचा-खुचा राशन खाकर पेट भरा जब वे लोग जंगलों में भटक रहे थे तभी चीन के तीन सो से अधिक सैनिकों ने उनको घेर लिया और उन्हें बंधक बनाकर चीन लेकर गए जब वह चीन पहुंचे तो वहां चार हज़ार से अधिक भारतीय सैनिकों को बंदी बनाया गया था जहां चीनी अधिकारियों के द्वारा सभी भारतीय सैनिकों को दो सो की टुकड़ियों में रखा गया तथा उनसे चीनी अधिकारियों के द्वारा भारतीय सेना के बारे में पूछताछ की जाती हयाद सिंह ने कहा लेकिन किसी भी भारतीय सैनिक के द्वारा अपना मुंह नहीं खोला गया हयाद सिंह मेहता ने बताया लगभग 6 महीने उन्हे अपने साथियों के साथ चीन की कैद में रहना पड़ा दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बाद उन्हें छोड़ा गया उन्होंने बताया उनके घर वालों को भी एक महीने बाद पता चला था कि वह चीनी सेना के चंगुल में फंस चुके हैं वहीं हयात सिंह मेहता आज 84 वर्ष के हो चुके हैं उनमें अभी भी वही देशभक्ति का जज्बा भरा हुआ है उनका कहना था अगर उनकी पलटन के पास पर्याप्त मात्रा में गोला बारूद होता तो वह चीनी सेना को पोस्ट में घुसने तक नहीं देते लेकिन फिर भी हमारी पलटन बहादुरी से लड़ी और कई चीनियों को मौत के घाट उतारा हर सैनिक अंतिम गोली तक बहादुरी के साथ लड़ा इस लड़ाई मैं उनके कई साथी शहीद हुए तो कई घायल हुए उन्होंने कहा लड़ाई काफी भयंकर थी हयाद सिंह ने कहा अगर आज भी उन्हें मौका मिले तो बॉर्डर पर लड़ने को तैयार है वही कलीगांव निवासी पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी प्रहलाद सिंह मेहता ने कहा उन्हें काफी गर्व है कि जांबाज हयाद सिंह मेहता हमारे गांव के हैं जिन्होंने बड़ी बहादुरी से चीनीयो का मुकाबला किया कई चीनियों को मौत के घाट उतारा तथा देश के लिए 6 महीने चीन की जेल काटी वे पूरे प्रदेश की शान है

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